जबलपुर। पाटन उप जेल में वर्षों से डटे अफसरों की छूट पर कैदी मजे उड़ा रहे हैं। यह मजे अफसर यूं ही मुहैया नहीं करवा रहे हैं, बल्कि उसके एवज में तगड़ा खर्च बटोर रहे हैं। ऐसा आरोप जेल से रिहा होने वाले बंदी ने लगाए हैं। बंदी का कहना था कि वसूली के लिए प्रताड़ित किया जाता है। इसमें मारपीट से लेकर कई प्रकार से प्रताड़ना दी जाती है। प्रताड़ना देने के लिए जेलर हेमेंद्र बागरी और रचना चौकसे के इशारे पर चार आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे कैदियों को लगाया गया है।
पाटन उपजेल से रिहा हुए एक बंदी ने जेल में निरू्घ बंदियों की हालत का कड़वा सच सामने ला दिया है। उसका कहना है कि जेल में पहुंचने के बाद वसूली शुरू हो जाती है। वसूली देने वाले बंदी को उसके हिसाब से आराम दिया जाता है। उधर, मुफ्त में रहने वाले बंदियों को नानाप्रकार से प्रताड़ित किया जाता है।
ऐसे शुरू होता है खेल
जेल गेट से अंदर होते ही जेल पर खाना-तलाशी के दौरान ही बंदी की बोली लग जाती है। बोली उठाने वाला कथित कैदी भूरा पटेल, विष्णु, कल्लू और संतोष उस पर वसूली के लिए दबाव बनाना शुरू कर देता हैं। बैरेक तक जाते-जाते नए बंदी को सेट कर लिया जाता है कि उसे हर महीने कितने पैसे देना है।
मुलाकात से मिलता संदेश : बंदी मुलाकात मे उसके परिजनों को संदेश मिल जाता है कि उसके बंदी को जेल के अंदर सुकून से रहने के लिए कितना खर्चा पहुंचाना है।
खर्चा लेते हैं चार बंदी : जेल से रिहा हुआ बंदी ने यह भी बताया कि खर्चा चार बंदी सहित रचना चौकसे लेती है। इस खर्चे का बंदरबांट कर लिया जाता है।
ऑफ दी रिकार्ड
- जेल में औचक विधिक सेवा प्राधिकरण की जांच में गायब मिले जेलर और अन्य अधिकारी।
- जेल के बच्चा वार्ड में भरे थे चार कैदी, टीवी का उठा रहे थे लुफ्त।
- निरीक्षण में बंदियों से पूछताछ में बंदियों ने कान में फुसफुसाए अफसरों की करतूतों के राज।
- खर्चा नहीं देने पर बंदी के साथ हाल ही मारपीट, दबाव में मुलायजा के समय बंदी मारपीट से मुकर गया।
