जबलपुर. प्रदेश के रीवा में 20 मई को पैदल विहार कर रहीं तीन जैन साध्वियों को एक अनियंत्रित कार ने कुचल दिया था। इस हादसे में आर्यिका श्रुतमति माताजी और सुमति माताजी (या उपक्षमती माताजी) का दुखद देवलोकगमन हो गया,जबकि एक अन्य साध्वी गंभीर रूप से घायल हैं। इस घटना के विरोध में जबलपुर में सोमवार 25 मई को बड़ी संख्या में महिलाएं,पुरुष और बच्चे सड़कों पर उतरे और मौन जुलूस निकाला।सुबह करीब साढ़े 8 बजे शहर के कमानिया गेट पर राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और मौन जुलूस घंटाघर तक निकाला। इस दौरान तहसीलदार को पीएम के नाम सामूहिक ज्ञापन भी सौंपा गया। जैन समाज के लोगों की मांग है कि एमपी के रीवा नगर में आर्यिका माताओं के साथ घटित दुर्घटना को लेकर आरोपी कार चालक पर कड़ी कार्रवाई की जाए एवं बीते दिनों ग्राम देवरान में 11 जैन प्रतिमाओं की चोरी का खुलासा पुलिस जल्द से जल्द करे।
जैन धर्मालंबियों का कहना है कि 20 मई को रीवा की घटना मानवता पर कलंक है। दो निरीह साध्वियों का कुचलना केवल दुर्घटना नहीं, यह हिंसा हो सकती है। यदि आज संत असुरक्षित हैं, तो कल हमारा धर्म असुरक्षित होगा। एक स्वर में मांग उठी है कि संत सुरक्षा कानून बनाया जाए। इन लोगों का कहना है कि बीते दिनों रीवा में जो घटना घटित हुई है, वह बहुत ही दुखद है। दो साध्वी सुबह जंगल तरफ जा रही थीं, उन्हें एक कार चालक ने रौंद दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना को लेकर आज मौन जुलूस निकाला गया है और कलेक्टर को ज्ञापन देते हुए मांग की जा रही है कि साध्वियों की मौत पर न्याय दिलाया जाए।
समाजजनों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जैन साधु-संत अहिंसक, निहत्थे और तपस्वी होते हैं। वे पैदल विहार कर संयम, शांति और अहिंसा का संदेश देते हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त है कि ऐसे संतों के साथ बढ़ती दुर्घटनाएं और हमले समाज के लिए गंभीर विषय हैं। समाज ने मांग की है कि साधु-संतों के विहार के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
20 मई को हुआ था हादसा
20 मई को टक्कर मारने के बाद कार चालक रीवा से फरार हो गया, जिसे कि करीब 270 किलोमीटर दूर बरगी पुलिस ने बहोरीपार टोल नाका के पास से गिरफ्तार किया और फिर उसे रीवा पुलिस के हवाले किया। कार चालक का नाम रशीद आबाद अली शाह है, जो कि महाराष्ट्र नागपुर का रहने वाला है।

