जबलपुर। जबलपुर में राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकी ने भारतीय जनता पार्टी के संभागीय कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं है बल्कि सदियों से प्रतीक्षित सामाजिक न्याय की वह प्रतिज्ञा है जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने धरातल पर उतारा है। यह विधेयक महिलाओं को नीति-निर्धारण और नेतृत्वकारी भूमिका में स्थापित करने का ऐतिहासिक कार्य करेगा। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, रूपा राव, अर्चना अग्रवाल, रिंकू विज, श्रीकान्त साहू, रंजीत पटेल, रवि शर्मा और चित्रकान्त शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
नेतृत्व और राजनीतिक सामर्थ्य का नया अध्याय
सांसद ने चर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि नया संसद भवन बनने के बाद आयोजित पहले सत्र की शुरुआत ही इस अधिनियम से हुई थी। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है जो महिलाओं को याचक से नायक की भूमिका में लेकर आएगा। सरकार 2023 के मूल कानून में आवश्यक संशोधन कर रही है ताकि जनगणना और परिसीमन के इंतजार की शर्त को समाप्त किया जा सके। लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि 2029 में जब देश नई सरकार का चुनाव करेगा तब संसद में 33 प्रतिशत सीटों पर नारी शक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित होगी। महिला प्रतिनिधियों के आने से संसदीय बहसों की गुणवत्ता में सुधार होगा और शासन में सकारात्मक योगदान मिलेगा।
विपक्षी दलों की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार
कांग्रेस की नीतियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने दशकों तक महिला आरक्षण के नाम पर केवल राजनीति की है। 1996 में देवगौड़ा सरकार के समय से लेकर 2014 तक इस विधेयक को लेकर कोई ठोस मंशा नहीं दिखाई गई। वर्ष 1998 में संसद के भीतर विधेयक की प्रति फाड़ने जैसी घटनाएं संसदीय गरिमा का अपमान थीं। उन्होंने शाह बानों मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण करोड़ों महिलाओं के हक को दबाया गया। वर्तमान सरकार ने किसी भी राजनीतिक विरासत से इतर सामान्य पृष्ठभूमि वाली बेटियों के लिए भी संसद के द्वार खोल दिए हैं।
महिला नेतृत्व आधारित विकास के बढ़ते कदम
पिछले 12 वर्षों में हुए कार्यों का विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि देश अब महिला-नेतृत्व आधारित विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया और उज्ज्वला योजना से 10.33 करोड़ महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाई। पीएम आवास योजना में 73% घरों का मालिकाना हक महिलाओं को मिला है। आर्थिक क्षेत्र में 56 करोड़ जनधन खातों में से 56% महिलाओं के हैं और मुद्रा योजना के तहत 35 करोड़ से अधिक ऋण उन्हें स्वरोजगार हेतु दिए गए हैं। आज भारत में 43% STEM ग्रेजुएट्स महिलाएं हैं और नागरिक उड्डयन में महिला पायलटों की संख्या भी निरंतर बढ़ रही है। सुकन्या समृद्धि योजना के माध्यम से 4.53 करोड़ बेटियों का भविष्य सुरक्षित किया गया है।
