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सब स्टेशनों पर बढ़ेंगी बुनियादी सुविधाएं, बिजली कर्मियों का तनाव दूर करने होंगी नई नियुक्तियां



मप्र विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने आउटसोर्स कर्मियों के लिए अलग निगम बनाने की उठायी मांग

जबलपुर। जबलपुर क्षेत्र में बिजली कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण हेतु मुख्य अभियंता और कर्मचारी संघ के बीच महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य अभियंता एस के गिरिया ने स्पष्ट किया कि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधाओं के साथ उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। बैठक के दौरान मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने संविदा, आउटसोर्स, नियमित कर्मियों और पेंशनर्स से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।

​कार्यकुशलता और तकनीकी सुरक्षा पर विशेष जोर

​मुख्य अभियंता एसके गिरिया ने फेडरेशन द्वारा प्रस्तुत मांग पत्र और सुझावों पर नियमानुसार संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जबलपुर क्षेत्र का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को निर्धारित समय पर गुणवत्तापूर्ण और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। क्षेत्र में प्रभावी राजस्व वसूली के लिए उन्होंने सभी अभियंताओं और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की। विभाग का यह उत्तरदायित्व है कि वह अपने फील्ड स्टाफ और लाइन कर्मचारियों की समस्याओं का समय-समय पर समाधान करे। तकनीकी कार्य करने वाले सभी कर्मियों को उच्च गुणवत्ता के सुरक्षा उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं ताकि कार्य के दौरान जोखिम को कम किया जा सके।

​आउटसोर्स कर्मियों के लिए निगम गठन की मांग

​फेडरेशन के महामंत्री राकेश डीपी पाठक ने बिजली कंपनियों में कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि जबलपुर क्षेत्र के कार्यालयों और सब स्टेशनों में मापदंड के अनुसार लाइनमैन, ऑपरेटर और हेल्पर उपलब्ध नहीं हैं, जिससे मौजूदा स्टाफ पर मानसिक तनाव बढ़ रहा है। फेडरेशन ने मांग की कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक अलग निगम या कंपनी स्थापित की जाए। तकनीकी कार्यों के लिए केवल निर्धारित शैक्षणिक योग्यता वाले पात्र व्यक्तियों को ही रखा जाए और उन्हें गहन प्रशिक्षण के बाद ही लाइनों या सब स्टेशनों पर तैनात किया जाए।

​वेतन वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा के प्रस्ताव

​कर्मचारी संघ ने आउटसोर्स कर्मियों के वेतन में महंगाई दर के आधार पर प्रतिवर्ष वृद्धि करने और उन्हें चिकित्सा प्रतिपूर्ति, जोखिम भत्ता, रात्रिकालीन भत्ता एवं मेडिक्लेम जैसी सुविधाएं देने का प्रस्ताव रखा। ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर परिवार के भरण-पोषण के लिए बीमा राशि 20 लाख निर्धारित करने और सेवानिवृत्ति की आयु सीमा 62 वर्ष करने की मांग की गई। इसके अतिरिक्त कार्यालयों में पदस्थ गैर तकनीकी कर्मचारियों को भी तकनीकी स्टाफ की तरह अवकाश के दिनों में कार्य करने पर अतिरिक्त वेतन देने की बात कही गई ताकि समानता का अधिकार सुनिश्चित हो सके।

​बुनियादी सुविधाओं और अधोसंरचना में सुधार

​वितरण केंद्रों और सब स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए आर ओ वाटर, पंखे और कूलर की व्यवस्था करने का आग्रह किया गया। सब स्टेशनों की भूमि की फेंसिंग, वृक्षारोपण, कार्यालय भवनों की मरम्मत और शौचालयों के निर्माण पर जोर दिया गया। बैठक में 33/11 केवी सब स्टेशनों पर रेस्ट रिलीवर ऑपरेटर की नियुक्ति और सभी केंद्रों पर पर्याप्त लाइन स्टाफ की तैनाती की मांग रखी गई। इस चर्चा में मुख्य अभियंता एस के गिरिया, अधीक्षण अभियंता लोकेश साहू, एजीएम एचआर अंजलि परते सहित फेडरेशन की ओर से राकेश डीपी पाठक, दिनेश दुबे, उमाशंकर दुबे, दीपक मेमने, राजेश मिश्रा, अतुल विश्वकर्मा, मोहित पटेल, गोपाल, पंकज ठाकुर, धर्मेन्द्र झारिया, दीपक कश्यप, दिनेश सोनकर, अक्षय श्रीवास्तव, बी एम तिवारी, जी के यादव और एस के ठाकुर उपस्थित रहे।

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