सेवा गणना और पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के खिलाफ तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
जबलपुर। पनागर क्षेत्र के शिक्षक संवर्ग ने अपनी विभिन्न विभागीय समस्याओं के निराकरण के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार को प्रस्तुत किया है। इस मांग पत्र में मुख्य रूप से सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति दिनांक से करने और शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को समाप्त करने पर जोर दिया गया है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्य प्रदेश के बैनर तले एकजुट हुए शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान नियमों के कारण वरिष्ठता और आर्थिक लाभों में विसंगतियां उत्पन्न हो रही हैं, जिससे प्रदेश के लाखों शिक्षकों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
सेवा अवधि की गणना और आईएफएमएस में सुधार की मांग
शिक्षकों का कहना है कि स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत नवीन शिक्षक संवर्ग की सेवा अवधि की गणना उनकी वास्तविक प्रथम नियुक्ति तिथि से की जानी चाहिए। वर्तमान में गणना के तरीकों में भिन्नता होने के कारण शिक्षकों को ग्रेच्युटी और अन्य सेवा लाभों से वंचित होना पड़ रहा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि आईएफएमएस पोर्टल पर शिक्षकों के डेटा में सुधार किया जाए ताकि उन्हें प्रथम नियुक्ति के आधार पर समस्त वित्तीय और सेवा लाभ प्राप्त हो सकें। शिक्षकों ने तर्क दिया कि सेवा की निरंतरता को स्वीकार करना उनके संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए आवश्यक है।
पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता और वैधानिक संकट पर चर्चा
दूसरे प्रमुख बिंदु में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 23 के संदर्भ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर पुनर्विचार याचिका दायर करने का आग्रह किया गया है। शिक्षकों के अनुसार अधिनियम प्रभावी होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा से छूट दी जानी चाहिए। इस नियम को भूतलक्षी प्रभाव से लागू किए जाने के कारण बड़ी संख्या में शिक्षकों के रोजगार और जीवन यापन पर संकट खड़ा हो गया है। ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से उमाशंकर पटेल, अजय रजक, जगत पटेल, अनिल पटेल, शरद शुक्ला, उमाकांत, संतोष पटेल, दुष्यंत विश्वकर्मा, जितेन्द्र कौर, नरेश पटेल, मनीषा सोनी, अरविन्द तिवारी, शालिग्राम राय, कमलेश पटेल, वर्षा जाट, गीता यादव, ज्योति शर्मा, उपासना, नीलम डबोर, प्रीति गाँधी, सरिता उइके, वीणा राणा, वंदना सोनी, राजकुमारी अहिरवार, मनीषा नामदेव, जयंती वडकरे, स्वाती शुक्ला, लक्ष्मण राव पिपले, राजभान हलदकार, संजय जसूजा, महेन्द्र सिंह डूडर, मेहरून निशा, गिरीश चन्द्र मौर्य, राय सिंह भदोरिया, रवेन्द्र यादव, रीता श्रीवास्तव और दीपक साहू उपस्थित रहे।

