अधिकारिक सूत्रों के अनुसार अस्पताल व क्लीनिक संचालन के लिए 1 जनवरी से 28 फरवरी तक नवीनीकरण अनिवार्य था। विभाग की ओर से पर्याप्त समय दिया गया। फिर भी संबंधित संस्थानों ने आदेश का पालन नहीं किया। जिसके बाद 5 अस्पतालों और 121 क्लीनिकों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया। इनमें से दो अस्पतालों ने स्वयं संस्थान बंद करने की बात भी कही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ नवनीत कोठारी द्वारा जारी आदेश में बताया गया कि जांच के दौरान कुछ अस्पतालों में पर्याप्त स्टाफ नहीं मिला। इसके अलावा नगर निगम से दस्तावेज भी सत्यापित नहीं पाए गए। जिन स्वास्थ्य संस्थानों पर कार्रवाई की गई है, उनका संचालन 1 अप्रैल से अवैध माना गया है। स्वास्थ्य विभाग ने जिन पांच अस्पतालों का पंजीकरण निरस्त किया हैए उनमें एसण्सीण् गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल में पर्याप्त स्टाफ नहीं मिला। संकल्प हॉस्पिटल के दस्तावेज नगर निगम से सत्यापित नहीं थेए जबकि नामदेव नर्सिंग होम का पंजीकरण नवीनीकरण नहीं कराया गया था। बटालिया आई हॉस्पिटल और सरकार हॉस्पिटल ने स्वयं संस्थान बंद करने के लिए आवेदन दिया है। सीएमएचओ डॉ नवनीत कोठारी ने कहा कि जांच के दौरान यदि कोई भी अस्पताल बिना वैध पंजीकरण के संचालित पाया जाता हैए तो उसके खिलाफ मध्यप्रदेश नर्सिंग होम एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिन अस्पताल और क्लीनिक संचालकों से समय सीमा चूक गई है। वे एमपी ऑनलाइन के माध्यम से पुन: आवेदन कर सकते हैं। पंजीकरण का हर तीन साल में नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। जांच में यह भी सामने आया कि क्लीनिकों की स्थिति अधिक गंभीर है। कुल 240 में से 89 क्लीनिकों ने नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं कियाए जबकि 32 संस्थानों के दस्तावेज अपूर्ण पाए गए। निरस्त क्लीनिकों में एलोपैथीए आयुर्वेदिक और होम्योपैथी के साथ कई पैथोलॉजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटर भी शामिल हैं।