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शब्दों में सिमटी मां की ममता: मंथनश्री के मंच पर देश-विदेश के रचनाकारों का जमावड़ा

स्वर्गीय रमा देवी नेमा की स्मृति में भव्य काव्य महोत्सव आयोजित,मातृ शक्ति के विविध स्वरूपों पर साहित्यकारों ने किया चिंतन

जबलपुर। जबलपुर में मंथनश्री संस्था के तत्वावधान में स्वर्गीय रमा देवी नेमा स्मृति काव्य महोत्सव का गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मॉरीशस से पधारे गोवर्धन सिंह सच्चिदानंद फ़ौदार उपस्थित रहे जबकि अध्यक्षता विजय नेमा अनुज ने की। अतिथियों ने अपने संबोधन में माता को गीता, गंगा और गायत्री का संगम बताया। उन्होंने कहा कि मां की महिमा का वर्णन शब्दों की सीमा से परे है और यह लेखकों के लिए अनंत अनुभूतियों का विषय है। मुख्य वक्ता राजेश पाठक प्रवीण ने मां के स्वरूप की व्याख्या करते हुए मंथनश्री की रचनात्मक यात्रा की सराहना की। स्वागत भाषण में संतोष नेमा ने स्वर्गीय रमा देवी के धार्मिक और सामाजिक योगदान को याद करते हुए उनके साहित्य प्रेम को रेखांकित किया।

काव्य गोष्ठी में रचनाकारों ने दी प्रभावी प्रस्तुतियां

​महोत्सव के दूसरे सत्र में आयोजित काव्य गोष्ठी के दौरान देशभर के रचनाकारों ने मां पर केंद्रित अपनी कृतियों का पाठ किया। अर्चना द्विवेदी गुदालु ने सरस्वती वंदना की तथा तरुणा खरे और ज्योति प्यासी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन कविता राय ने और आभार प्रदर्शन कविता नेमा ने किया। काव्य पाठ करने वाले प्रमुख कवियों में डॉ. कृष्ण कुमार नेमा, रश्मि पाण्डेय, प्रभा बच्चन श्रीवास्तव, प्रीति नामदेव, नवनीता दुबे, राम वल्लभ गुप्त इंदौरी, प्रदीप नामदेव, संजय जैन मुंबई, रेखा नेमा, इंजी. हेमंत कुमार जैन और ज्योति प्यासी शामिल रहे। इनके अतिरिक्त डॉ. सलमा जमाल, मदन श्रीवास्तव, संध्या द्विवेदी, राजकुमारी रैकवार, नारायण तिवारी, प्रो. शरद नारायण खरे, तरुणा खरे, ज्योति मिश्रा, डॉ. तनूजा चौधरी, रजनी कटारे, अनीता उपाध्याय, आरती श्रीवास्तव, अनुराधा गर्ग, मुकुल तिवारी, रेखा ताम्रकार, सुभाष शलभ, योगिता चौरसिया, मनोज जैन, विनीता पैगवार, सुशील जैन आभा, प्रभा विश्वकर्मा और अमित सिंह बाबा ने अपनी कविताओं के माध्यम से भावपूर्ण प्रस्तुति दी। समापन पर सभी सहभागी साहित्यकारों को रमादेवी स्मृति मंथनश्री काव्य चेतना अलंकरण से सम्मानित किया गया।

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