पंकज स्वामी
आशा भोंसले का आज 12 अप्रैल को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर जैसे ही फैली वैसे ही मीडिया में आशा भोंसले को लेकर फाइलें खोजी जाने लगी। जबलपुर का मीडिया उनके जबलपुर के रिश्तों को लेकर खोजबीन करने लगा। यह सत्य है कि आशा भोंसले का जबलपुर से कोई संबंध नहीं रहा। न तो वे और न ही लता मंगेशकर कभी जबलपुर आईं और न ही उन्होंने यहां कोई उन्होंने लाइव कंसर्ट किया। जबलपुर में दोनों बहिनों का लाइव कंसर्ट करवाना किसी के वश में नहीं था और न ही किसी की हैसियत थी। अलबत्ता जबलपुर और आशा भोंसले का अनोखा संबंध रहा है। आशा भोंसले जिन्हें फिल्म इंडस्ट्री आशा ताई के नाम से ज्यादा जानती-पहचानती व पुकारती थी वे अपनी बड़ी बहिन लता मंगेशकर की तुलना में कहीं ज्यादा बहुमुखी और मिलनसार थीं। दरअसल जबलपुर की फिल्म प्रेमी लोग अपने मनपसंद कलाकारों की फिल्मों को देखने के साथ फिल्मों के गीतों को सुनने के लिए टॉकीज जाया करते थे। इन गीतों में अधिकांश आशा भोंसले के गाए गीत रहते थे। वह ज़माना सिंगल स्क्रीन का था। उस समय गानों को सुनने का जरिया रेडियो था या लोग टॉकीज में लगी फिल्म में जाया करते थे। कुछ लोग तो आशा भोंसले के गाए गानों के इतने शौकीन थे कि उन्हें जानकारी रहती थी कि किस शो में कितने बजे वह गीत पर्दे पर दिखेगा। गानों के शौकीन गेटकीपर से जुगाड़ करके टॉकीज में प्रविष्ट होकर अपना मनपसंद गीत सुन लेते और खत्म होते ही बाहर निकल आते थे। उस समय अखबारों में फिल्म के विज्ञापन में कलाकारों के परिचय के साथ उस फिल्म के लोकप्रिय गीतों का विवरण रहता था। उस ज़माने को याद करें तो जबलपुर के फिल्मों के शौकीन लोगों ने आशा भोंसले के गाए गानों के कारण फिल्में देखी हैं। याद करें तो आशा भोंसले के गाए गीत यादों की बारात का चुरा लिया है तुमने जो दिल को, हरे राम हरे कृष्ण फिल्म का कल्ट क्लासिक गीत दम मारो दम, अपना देश फिल्म का दुनिया में लोगों को, जानी मेरा नाम फिल्म का हुस्न के लाखों रंग, कारवां फिल्म का पिया तू अब तो आ जा, डॉन फिल्म का ये मेरा दिल यार का दीवाना, मेरा साया का झुमका गिरा, किस्मत फिल्म का आओ हुजूर तुमको, उमराव जान के इन आंखों की मस्ती व दिल क्या चीज़ है खूब देखे गए और लाउड स्पीकरों में खूब बजे हैं। टॉकीजों में इन गीतों के आते ही लोग डांस करने लगते थे। टॉकीज के भीतर पूरा माहौल जबर्दस्त हो जाता था। कोई भी मौका हो लाउड स्पीकर लगता था और जो गाने बजाए जाते थे उसमें सर्वाधिक आशा भोंसले के गीत होते थे। यहां जिन गीतों का जिक्र किया गया है वह आशा भोंसले के लोकप्रिय गीत हैं लेकिन सातवें दशक में हम किसी से कम नहीं फिल्म के है अगर दुश्मन, मिल गया हमको साथी मिल गया, हमको तो यारा है तेरी यारी और ये लड़का है अल्लाह कैसा है दीवाना फिल्म रिलीज होने के वर्ष से लेकर सालों तक बजते रहे। जबलपुर में आशा भोंसले के गानों की इतनी धूम रहती थी कि होली या अन्य मस्ती के समय गानों के साथ लोग जिन अभिनेत्रियों पर गाने को फिल्माया गया था, उनकी अदा को हूबहू प्रदर्शित करते हुए नृत्य करते थे। आज भी ऐसे दृश्य कभी कभार देखने को मिल जाते हैं।
खैर यह बात तो आशा भोंसले के लोक्रिपय गीतों की है लेकिन इज़ाजत फिल्म में उनके गाए गीत मेरा कुम सामान और लगान फिल्म का गीत राधा कैसे ना जले को संगीत मर्मज्ञ ज्यादा बेहतर मानते हैं। संगीतकारों का मानना है कि आशा भोंसले के गैर फिल्मी गीत अद्भुत हैं। भले ही आशा भोंसले सिर्फ देह से मुक्त हुई हैं, आत्मा उनकी आवाज में है। और सुरीली होकर कानों में गूँजती रहेगी। जबलपुर की पीढ़ियां उनके गीतों को गुनगुनाएगी और शौकीन लोग उन पर नृत्य करके आशा भोंसले को याद करेंगे।
