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8वां वेतन आयोग- OPS पर आर-पार, NC-JCM ने सौंपी डिमांड लिस्ट, यहां जानिए क्या-क्या है मांगों में शामिल

ई दिल्ली. नेशनल काउंसिल (ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी एनसी जेसीएम) के स्टाफ साइड ने 8वें वेतन आयोग को एक पत्र लिखा है, जिसमें ज्ञापन जमा करने की मौजूदा प्रोसेस को लेकर चिंताएं जताई गई हैं. इस पत्र में, प्रतिनिधियों ने कई अहम मुद्दों पर रोशनी डाली है और इस प्रोसेस को ज्यादा समावेशी, विस्तृत और असरदार बनाने के लिए कुछ उपायों का सुझाव दिया है.

ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी एक ऐसे प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करती है, जहां कर्मचारियों के प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी सेवा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हैं और बातचीत के ज़रिए विवादों को सुलझाते हैं. यह घटनाक्रम केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए काफी अहम है, क्योंकि आने वाला 8वां वेतन आयोग उनकी सैलरी, पेंशन और काम से जुड़े फायदों पर सीधे तौर पर असर डालेगा. यह पत्र कर्मचारियों की चिंताओं को-खास तौर पर पेंशन से जुड़ी चिंताओं को-चर्चा के केंद्र में रखता है.

पत्र में क्या कहा गया था?

1 अप्रैल, 2026 की तारीख वाले इस पत्र में, स्टाफ साइड ने 8वें वेतन आयोग के सदस्य सचिव पंकज जैन को संबोधित किया. यह पत्र एनसी-जेसीएम के स्टाफ साइड के सचिव, शिवा गोपाल मिश्रा ने भेजा था. पहले हुए पत्राचार और चर्चाओं का हवाला देते हुए, स्टाफ साइड ने कहा कि कई हितधारकों ने ज्ञापन जमा करने की प्रोसेस के मौजूदा ढांचे और उसकी सीमाओं को लेकर चिंताएं जताई हैं. इस पत्र में इन मुद्दों को सुलझाने की जरूरत पर जोर दिया गया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इस प्रोसेस में ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी हो और ज्यादा डिटेल्ड सुझाव मिल सकें. पत्र में लिखा था कि ये चिंताएं हितधारकों द्वारा बड़े पैमाने पर व्यक्त की जा रही हैं, और एक ज्यादा इंक्लूसिव, व्यापक और असरदार ज्ञापन जमा करने की प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए इनमें जरूरी बदलाव किए जाने की आवश्यकता है.

ये डिमांड लिस्ट

शब्दों की सीमा बढ़ाना: मौजूदा 3,500 अक्षरों (कैरेक्टर्स) की सीमा—जो कि 500 शब्दों के बराबर है—को इस संस्था ने अपर्याप्त बताया है. इसलिए, संस्था ने अनुरोध किया है कि हर विषय के लिए शब्दों की सीमा को बढ़ाकर कम से कम 1,000 शब्द कर दिया जाए, ताकि सार्थक और पूरी जानकारी वाले ज्ञापन जमा किए जा सकें.

सब-क्वेश्चंस के लिए क्लीयर प्रोविजंस: संस्था ने कहा कि मौजूदा प्रारूप में हर विषय के तहत आने वाले सभी सब-क्वेश्चंस या सब-टाइटल्स के जवाब देने की स्पष्ट सुविधा नहीं है. संस्था ने एक व्यवस्थित प्रारूप की मांग की है और कहा है कि जवाब देने वालों को बिना किसी रोक-टोक के, हर सब-क्वेश्चन का जवाब व्यवस्थित तरीके से देने की सुविधा मिलनी चाहिए.

पेंशन रिफॉर्म्स (ओपीएस/एनपीएस/ओपीएस) पर विचार जमा करने का प्रावधान: पत्र में जिन सबसे अहम स्थितियों पर रोशनी डाली गई थी, उनमें से एक एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम) और यूपीएस (यूनिफाइड पेंशन स्कीम) के तहत आने वाली समस्याएं थीं. इस संस्था ने सीसीएस नियमों के तहत पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल करने की मांग की. पत्र में कहा गया कि सरकारी कर्मचारियों पर कोई अंशदायी पेंशन योजना लागू नहीं की जानी चाहिए.

पेंशनर्स के मुद्दों को शामिल करना: स्टाफ साइड ने एक स्पेशल प्रोविजंस बनाने की मांग की, जो पेंशन से जुड़े मुद्दों को हल करे, इनमें रिटायरमेंट बेनिफिट, रिविजंस, पेंशन में समानता, पेंशन के कम्यूटेड मूल्य की बहाली, पेंशन में बढ़ोतरी और अन्य कल्याणकारी उपाय शामिल हैं.

महिला कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी प्रावधान: संस्था ने प्रस्ताव दिया कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों के लिए एक अलग अनुभाग शामिल किया जाना चाहिए. इनमें वर्कप्लेस पर सुरक्षा, मातृत्व लाभ, मासिक धर्म से जुड़े कल्याणकारी उपाय, बाल देखभाल अवकाश (सीसीएल) और लैंगिक समानता की नीतियां शामिल हैं.

डिपार्टमेंट स्पेसिफिक इश्यूज: पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि अलग-अलग सरकारी विभागों को अपनी तरह की खास समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इसलिए, इसमें सुझाव दिया गया कि एक ऐसा प्रावधान किया जाए जिससे बेहतर पॉलिसी मेकिंग के लिए डिपार्टमेंट स्पेसिफिक इश्यूज पर सुझाव या प्रस्ताव जमा किए जा सकें.

प्रस्ताव जमा करने की समय सीमा बढ़ाना: स्टाफ साइड ने डिपार्टमेंट स्पेसिफिक इश्यूज पर परामर्श के लिए और अधिक समय मांगा है, और ज्ञापन जमा करने के लिए 31 मई, 2026 की नई समय सीमा का प्रस्ताव रखा है. संस्था ने कहा कि विभिन्न महासंघों, यूनियनों और संघों को पूरे देश में अपने संबद्ध संगठनों के साथ परामर्श करने के लिए और अधिक समय की आवश्यकता है.

अटैचमेंट के साइज की सीमा बढ़ाना: पत्र में ज्ञापन जमा करने से जुड़ी तकनीकी सीमाओं की ओर भी ध्यान दिलाया गया है, क्योंकि वर्तमान सीमा केवल 2 एमबी है. इसमें प्रस्ताव दिया गया है कि इस सीमा को बढ़ाकर 10 एमबी कर दिया जाए. ऐसा करने से विस्तृत रिपोर्ट, अनेक्सचर और डेटा जमा करना संभव हो पाएगा.

प्रस्ताव जमा करने के तरीकों में विस्तार: ज्ञापन को ऑनलाइन जमा करने के अलावा, पत्र में यह सुझाव भी दिया गया है कि विभिन्न संस्थाओं को ऑनलाइन माध्यम के साथ-साथ ईमेल और हार्ड कॉपी के ज़रिए भी अपने प्रस्ताव या अभ्यावेदन जमा करने की अनुमति दी जानी चाहिए. संस्था ने लिखा, इससे पहुंच सुनिश्चित होगी, तकनीकी बाधाएं कम होंगी और संचार का एक वैकल्पिक माध्यम उपलब्ध हो सकेगा.

स्टाफ साइड ने आयोग के साथ आगे भी संवाद जारी रखने में अपनी रुचि व्यक्त की है. संस्था ने पत्र में कहा कि हम 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के साथ 13-04-2026 के बाद किसी भी सुविधाजनक तारीख पर बैठक करना चाहेंगे.


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