किसानों का आरोप है कि 112 नंबर पर फोन करने के बावजूद कोई समय पर नहीं पहुंचा। तहसील में खुद की फायर ब्रिगेड न होने की वजह से जिला मुख्यालय से गाड़ी बुलाई गई, जिसे पहुंचने में काफी देर हो गई। इस बीच ग्रामीणों ने खुद ही जान जोखिम में डालकर आग बुझाने की कोशिश की। ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि क्षेत्र में हार्वेस्टर चलाने वालों की मनमानी बढ़ गई है। अगली फसल की बुवाई के चक्कर में किसान खेतों में नरवाई जला रहे हैंए जबकि सरकार ने इस पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। इसी लापरवाही की वजह से आग ने इतना विकराल रूप लिया और दर्जनों किसानों का भारी नुकसान हो गया। एसडीएम निधि गोहल ने पटवारी को आदेश दिए हैं कि वह तुरंत नुकसान का सर्वे करें और आग लगने की असल वजह का पता लगाएं। उन्होंने साफ कहा कि नरवाई जलाना अपराध है और जो भी इसमें दोषी पाया जाएगाए उस पर सख्त कार्रवाई होगी। फिलहालए पीडि़त किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं और उन्होंने तहसील स्तर पर दमकल गाड़ी की स्थायी व्यवस्था करने की अपील की है।