शहर के बीचों-बीच प्रदूषण का जहर: छुई खदान से लेकर बिलहरी तक आगजनी से मचा हड़कंप
जबलपुर। शहर में गर्मी के दस्तक देते ही कचरे के ढेरों में आग लगने की घटनाओं ने विकराल रूप ले लिया है। शहर के सबसे पुराने शास्त्री ब्रिज के नीचे बना डंपिंग जोन अब स्थानीय निवासियों और राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। यहां आए दिन लगने वाली आग ने वायु प्रदूषण के स्तर को खतरनाक स्थिति में पहुंचा दिया है। गत दिवस एक ही दिन में शहर के दो अलग-अलग स्थानों पर कचरे के पहाड़ धधक उठे। सुबह 6.25 बजे शास्त्री ब्रिज के नीचे कचरे के ढेर में भीषण आग लग गई जिससे चारों ओर अफरातफरी का माहौल बन गया। स्थानीय नागरिकों की सूचना पर फायर ब्रिगेड का अमला मौके पर पहुंचा और कड़ी मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया। इसके कुछ ही घंटों बाद दोपहर में छुई खदान क्षेत्र में कचरे के ढेर ने आग पकड़ ली। यहां रांझी से पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने आग को बुझाया। इन घटनाओं ने नगर निगम के स्वच्छता अभियान की पोल खोलकर रख दी है।
धधकते डंपिंग जोन,शास्त्री ब्रिज और छुई खदान में मची अफरातफरी
शास्त्री ब्रिज के नीचे जमा कचरा केवल गंदगी का ढेर नहीं बल्कि शहर के बीचों-बीच एक सुलगता हुआ ज्वालामुखी बन चुका है। बुधवार को हुई आगजनी ने आसपास के रहवासी क्षेत्रों में दहशत फैला दी। बिलहरी क्षेत्र में भी हनुमान मंदिर के पास लगे पेड़ के सूखे पत्तों में आग लगने की खबर मिली जिसे स्थानीय लोगों ने फायर ब्रिगेड के आने से पहले ही बुझा लिया। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि शहर का वातावरण किस कदर असुरक्षित होता जा रहा है। आग लगने के कारण उठने वाला गाढ़ा काला धुआं फेफड़ों के लिए जहर बन चुका है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह डंपिंग साइट रेलवे ट्रैक के बिल्कुल बगल में स्थित है जिससे किसी भी समय बड़ी रेल दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है। घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है और प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है।
रेलवे ट्रैक और रहवासी क्षेत्र,कचरा बीनने वालों की लापरवाही बनी मुसीबत
कचरे के इन ढेरों में आग लगने के पीछे कबाड़ी और कचरा बीनने वालों की बड़ी भूमिका सामने आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार ये लोग कचरे के ढेर से अपने काम का कीमती सामान निकाल लेते हैं और शेष बचे जहरीले कचरे को ठिकाने लगाने के लिए उसमें आग लगा देते हैं। इस प्रक्रिया में निकलने वाली गैसें और धुआं पूरे शहर की आबोहवा को खराब कर रहा है। रेलवे लाइन के समीप होने के कारण ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों को भी इस दमघोंटू धुएं का सामना करना पड़ता है। डंपिंग जोन को शहर के बाहर स्थानांतरित करने की मांग लंबे समय से की जा रही है लेकिन कबाड़ियों की इन अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने में पुलिस और प्रशासन दोनों विफल साबित हुए हैं। कचरे में मौजूद प्लास्टिक और रासायनिक अपशिष्ट जलने से कैंसरकारी तत्व हवा में घुल रहे हैं जो जनस्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है।
स्वास्थ्य अधिकारी के खोखले वादे, खराब कॉम्पैक्टर और प्रशासनिक सुस्ती
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूर्व में स्वास्थ्य अधिकारी ने आश्वासन दिया था कि कचरा उठाने वाले कॉम्पैक्टर खराब हैं और उनके ठीक होते ही पूरा कचरा हटा लिया जाएगा। हालांकि धरातल पर हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं। मशीनों के खराब होने का बहाना बनाकर शहर की जनता को जहरीले धुएं में मरने के लिए छोड़ दिया गया है।
