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मदन महल अतिक्रमण: अब सिर्फ कार्रवाई का इंतज़ार, कल टूटेगा बरसों का सन्नाटा

 



जबलपुर। शहर की ऐतिहासिक मदन महल पहाड़ी पर वर्षों से जमे अतिक्रमणकारियों के लिए शनिवार बड़ी मुसीबत लेकर आने वाला है। सर्वोच्च न्यायालय के सख्त रुख के बाद जिला प्रशासन ने इस क्षेत्र को पूरी तरह खाली कराने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। 7 मार्च की सुबह से पहाड़ी के अलग-अलग हिस्सों में भारी मशीनों और पुलिस बल की मौजूदगी में बेदखली की कार्रवाई शुरू की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी प्रकार की मोहलत नहीं दी जाएगी।

पुरवा क्षेत्र से होगी कार्रवाई की शुरुआत

​एसडीएम गोरखपुर अनुराग सिंह के अनुसार, इस बड़े अभियान का आगाज पुरवा स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के ठीक सामने वाले हिस्से से होगा। प्रशासन ने पिछले कई दिनों से इलाके में मुनादी करवाई है ताकि लोग अपनी मर्जी से अवैध निर्माण हटा लें। अधिकारियों का कहना है कि "हमारा उद्देश्य शांतिपूर्ण ढंग से अदालती आदेशों का पालन करना है, इसलिए हमने प्रभावितों को स्वयं अतिक्रमण हटाने का पर्याप्त समय दिया है।" इसके बावजूद जो निर्माण शेष रहेंगे, उन्हें नगर निगम, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा ढहा दिया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चलेगा अभियान

​इस पूरे मामले में निर्णायक मोड़ तब आया जब शांति बाई शर्मा एवं अन्य की याचिका पर 24 फरवरी को सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पुराने आदेशों का अक्षरशः पालन करने का सख्त निर्देश दिया है। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया है कि "अतिक्रमण हटाने की प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों जगह प्रस्तुत करनी होगी।" इस ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए प्रशासन अब किसी भी प्रकार की ढील देने के मूड में नहीं है। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे इस मुहिम में बाधा न बनें और कानून का सम्मान करें।

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