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सिस्टम की नींद और सड़क पर तड़पती जान: वो खौफनाक मंजर जिसने नेशनल हाईवे को बना दिया रणक्षेत्र!



जबलपुर। जबलपुर-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर शुक्रवार को हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनएच-45 पर स्थित शाहपुरा के पास एक अनियंत्रित मोटरसाइकिल की टक्कर से महिला की मौत हो गई, जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने हाईवे पर चक्का जाम कर दिया। इस विरोध प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं और घंटों तक आवागमन पूरी तरह बाधित रहा।

​बाइक की टक्कर से हुई दुर्घटना

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, उमरिया सुरई गांव के निवासी 48 वर्षीय गणेश सेन अपनी पत्नी के साथ निजी काम से शाहपुरा की ओर जा रहे थे। जब वे अपनी मोटरसाइकिल से राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहुंचे, तभी पीछे से आ रही एक अन्य मोटरसाइकिल ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। बताया जा रहा है कि पीछे वाली बाइक पर तीन युवक सवार थे जो काफी तेज गति में वाहन चला रहे थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों मोटरसाइकिलों पर सवार लोग सड़क पर दूर जा गिरे। इस दुर्घटना में गणेश सेन की पत्नी के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में प्राणघातक चोटें आईं, जिसके कारण उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

​प्रशासनिक देरी से भड़का गुस्सा

​हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने मानवता दिखाते हुए तत्काल 108 एम्बुलेंस सेवा और क्षेत्रीय शाहपुरा पुलिस को दुर्घटना की सूचना दी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सूचना देने के एक घंटे बाद तक न तो मौके पर एम्बुलेंस पहुंची और न ही पुलिस का कोई जिम्मेदार अधिकारी वहां पहुंचा। आपातकालीन सेवाओं की इस सुस्ती और प्रशासनिक संवेदनहीनता को देखकर ग्रामीणों का सब्र टूट गया। लोगों ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और मृत महिला का शव बीच सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना था कि यदि समय पर सहायता मिल जाती तो शायद स्थिति कुछ और होती।

​हाईवे पर लगा जाम, मुआवजे की मांग

​प्रदर्शनकारियों ने जबलपुर-भोपाल हाईवे के दोनों तरफ के रास्तों को पूरी तरह से बंद कर दिया। इस चक्का जाम की वजह से यात्री बसें, ट्रक और अन्य निजी वाहन बीच रास्ते में ही फंस गए, जिससे मुसाफिरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण मौके पर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाने और पीड़ित परिवार को तत्काल उचित आर्थिक मुआवजा देने की मांग पर अड़े रहे। समाचार लिखे जाने तक ग्रामीण सड़क पर ही डटे हुए थे और प्रशासन की ओर से बातचीत का सिलसिला जारी था। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक ठोस कार्रवाई और मुआवजे का आश्वासन नहीं मिलता, वे सड़क से शव नहीं हटाएंगे।

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