जबलपुर। नगर निगम प्रशासन ने संपत्ति कर के बड़े बकायादारों से वसूली के लिए अब तक की सबसे कठोर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने शहर के समस्त बैंकों के रीजनल मैनेजर्स को एक औपचारिक पत्र प्रेषित कर बड़े बकायादारों के बैंक खातों की विस्तृत जानकारी तलब की है। निगम का मुख्य उद्देश्य इन खातों को सीज कर बकाया राशि की सीधे वसूली सुनिश्चित करना है। इस कदम से उन करदाताओं में हड़कंप मच गया है जो लंबे समय से नोटिस मिलने के बावजूद करों का भुगतान नहीं कर रहे थे।
वैधानिक प्रावधानों और अदालती फैसलों का आधार
निगमायुक्त द्वारा जारी पत्र में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि यह समस्त कार्यवाही मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत की जा रही है। विशेष रूप से धारा 173, 174, 175 एवं 178 के प्रावधानों के तहत करों की वसूली के लिए वैधानिक प्रक्रिया और कुर्की का अधिकार निगम के पास सुरक्षित है। इन कानूनी प्रावधानों के तहत बकाया देयों की वसूली के लिए बैंक खातों में जमा राशि को 'चल संपत्ति' की श्रेणी में रखा गया है। इसके समर्थन में पत्र में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण फैसलों जैसे 'Standard Chartered bank बनाम Andhra bank financial services Ltd' और 'State of Maharashtra बनाम Tapas D- Neogy' का भी हवाला दिया गया है। इन न्यायिक दृष्टांतों में स्पष्ट रूप से बैंक में जमा धनराशि को चल संपत्ति माना गया है, जिसके आधार पर उच्च न्यायालयों ने भी बैंक खातों से सीधे वसूली को विधि सम्मत ठहराया है।
बैंकों को सौंपी गई डिफाल्टरों की सूची
नगर निगम ने अपनी इस रणनीति के तहत उन बकायादारों की एक व्यापक सूची बैंकों को उपलब्ध कराई है, जिन पर भारी मात्रा में टैक्स बकाया है। बैंकों से अपेक्षा की गई है कि वे इन चिन्हित व्यक्तियों और संस्थाओं के चालू एवं बचत खातों का संपूर्ण विवरण, जिसमें खाताधारक का पूरा नाम और पता शामिल हो, निगम को यथाशीघ्र उपलब्ध कराएं। इस जानकारी के मिलते ही निगम प्रशासन संबंधित खातों को फ्रीज करने और उनमें मौजूद राशि को सरकारी खजाने में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर देगा। इससे पहले निगम ने संपत्तियों की कुर्की और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में तालाबंदी जैसी कार्रवाइयां भी की थीं, लेकिन अब सीधे वित्तीय स्रोतों पर प्रहार कर वसूली को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
खाली खजाना भरे ताकि विकास कार्यों न रुकें
राजस्व वसूली की इस सख्त कार्रवाई के पीछे निगम की वित्तीय स्थिति और शहर के विकास कार्यों की आवश्यकता को प्रमुख कारण बताया गया है। निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि "नगर निगम को शहर के लाखों करदाताओं से करोड़ों रुपये की वसूली करनी शेष है और बार-बार चेतावनी के बाद भी कई बड़े बकायादार सहयोग नहीं कर रहे हैं।" उन्होंने आगे बताया कि "वर्तमान में निगम का खजाना रिक्त होने की स्थिति में है और शहर के विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए राजस्व की प्राप्ति अत्यंत अनिवार्य हो गई है।" प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में भी ऐसे डिफाल्टरों के विरुद्ध बिना किसी रियायत के कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी ताकि शहर की नागरिक सुविधाओं को प्रभावित होने से बचाया जा सके।
