khabar abhi tak

होम डिलीवरी बंद: हॉकरों का कमीशन डकार रहे गैस एजेंसी संचालक

 


जबलपुर। जबलपुर में घरेलू गैस वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। गैस एजेंसियों की मनमानी और नियमों की अनदेखी के कारण आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में स्थिति यह है कि शहर की अधिकांश गैस एजेंसियों ने होम डिलीवरी की सुविधा पूरी तरह बंद कर दी है, जिससे उपभोक्ताओं को खुद गोदामों तक जाकर कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।

​होम डिलीवरी बंद होने से उपभोक्ताओं की मुसीबत

​जबलपुर की गैस एजेंसियों पर इन दिनों उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय के दावों के विपरीत धरातल पर एलपीजी की किल्लत बढ़ती नजर आ रही है। नए नियमों के मुताबिक अब उपभोक्ताओं को 25 दिन के अंतराल पर ही सिलेंडर मिल पा रहा है। इस बीच एजेंसियों ने डिलीवरी सिस्टम को ठप कर दिया है। लोग अपने निजी वाहनों पर सिलेंडर लादकर ले जाने को मजबूर हैं। घंटों लाइन में लगने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल रही है।

​हॉकरों का कमीशन डकार रहे एजेंसी संचालक

​सबसे गंभीर मुद्दा आर्थिक अनियमितता का सामने आया है। नियमानुसार गैस सिलेंडर की रिफिल बुक करने पर उसमें होम डिलीवरी का शुल्क शामिल होता है। गैस एजेंसियों द्वारा होम डिलीवरी बंद किए जाने के बावजूद उपभोक्ताओं से पूरा पैसा वसूला जा रहा है। इसमें हॉकरों को दिया जाने वाला 32 रुपये का कमीशन भी शामिल है। यह पैसा न तो हॉकरों को मिल रहा है और न ही उपभोक्ताओं को रिफंड किया जा रहा है। एजेंसी संचालक यह अतिरिक्त राशि सीधे अपनी जेबों में भर रहे हैं।

​हॉकरों के सामने पैदा हुआ आजीविका का संकट

​डिलीवरी व्यवस्था बंद होने का सबसे बुरा असर हॉकरों पर पड़ा है। जो हॉकर प्रतिदिन 300 से 400 रुपये की कमाई कर लेते थे, अब उनके पास काम ही नहीं बचा है। उन्हें एजेंसियों से सप्लाई के लिए सिलेंडर नहीं दिए जा रहे हैं। प्रति सिलेंडर मिलने वाला 32 रुपये का कमीशन बंद होने से उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। यदि एजेंसियां पुनः होम डिलीवरी शुरू कर दें, तो केंद्रों पर लगने वाली भीड़ आधी हो सकती है, लेकिन प्रबंधन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

​तेल कंपनियों के अधिकारियों की निष्क्रियता

​पेट्रोलियम मंत्रालय और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की गाइडलाइन में स्पष्ट उल्लेख है कि होम डिलीवरी अनिवार्य है। यदि कोई उपभोक्ता स्वयं एजेंसी जाकर सिलेंडर उठाता है, तो उसे निर्धारित शुल्क में छूट मिलनी चाहिए और इसकी बाकायदा रसीद दी जानी चाहिए। जबलपुर में इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनी के अधिकारी इस पूरे मामले से अवगत होने के बावजूद कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। प्रशासन की इस चुप्पी के कारण एजेंसी संचालकों के हौसले बुलंद हैं।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak