बताया गया है कि 9वीं कक्षा क ा छात्र फ्री फायर गेम में दिन-रात डूबा रहता था। यह सब वह उस वक्त करता था जब घरवाले काम पर होते या रात को सो जाते थे। धीरे-धीरे इस आभासी दुनिया ने उसे वास्तविक जीवन से दूर कर दिया। गेम की इस लत ने उसने अपना मानसिक संतुलन खो दिया, पिछले कुछ दिनों से छात्र ने खुद को कमरे में बंद कर लिया है। सामाजिक मेलजोल खत्म कर दिया है। मोबाइल छीनने या गेम रोकने पर वह अत्यधिक गुस्सा और हिंसक व्यवहार करता है। रात भर जागकर गेम खेलने के कारण उसे शारीरिक और मानसिक थकावट रहती है। परिजनों ने बताया कि उसकी स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उसने स्कूल जाना छोड़ दिया। जब उसकी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए मोबाइल छीना गया, तो उसकी मानसिक स्थिति और भी गंभीर हो गई। वर्तमान में परिजन इलाज के लिए भटक रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिल पाया है। डाक्टरों की माने तो जब बच्चा लगातार ऐसे गेम खेलता है तो उसका दिमाग हमेशा फाइट या फ्लाइट मोड में रहता है। यह डिजिटल व्यसन किसी नशीले पदार्थ की लत से कम खतरनाक नहीं है।