भोपाल। मध्यप्रदेश में अब डेयरी सहकारी समितियों को छोड़कर सभी दूध उत्पादकों और दूध विक्रेताओं को लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। राज्य सरकार ऐसे सभी दुग्ध उत्पादकों और विक्रेताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू करेगी।
इसके साथ ही दूध संग्रह, परिवहन में उपयोग होने वाले उपकरणों और भंडारण व्यवस्था की जांच के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। राज्य में ऐसे दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की पहचान की जाएगी जो अभी तक पंजीकृत नहीं हैं। इसके अलावा दूध से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी की मासिक रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रदेश में दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में पिछले वर्ष नेशनल डेयरी डव्लपमेंट बोर्ड के साथ अनुबंध भी किया गया था। जानकारी के अनुसार प्रदेश में कुल दूध उत्पादन का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा भैंस के दूध का है। वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 652 से 707 ग्राम प्रतिदिन रही।
एमपी में 213 लाख टन दूध का उत्पादन-
मध्यप्रदेश देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां देश के कुल दूध उत्पादन का करीब 9 प्रतिशत यानी लगभग 213 लाख टन दूध का उत्पादन होता है। राज्य में सांची दूध प्रमुख डेयरी ब्रांड है और ग्रामीण क्षेत्रों में दूध संग्रह को बढ़ावा देने के लिए 381 नई सहकारी समितियां भी कार्य कर रही हैं।
25 गाय रखने पर 10 लाख रुपए प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान-
प्रदेश सरकार ने दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए डॉण् भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना भी शुरू की है। इस योजना के तहत 25 गायों की यूनिट स्थापित करने पर 10 लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है।