khabar abhi tak

रेलवे : 3 लाख ट्रैक मेंटेनर्स, इंजीनियरिंग कर्मियों को 8 घंटे ड्यूटी के बाद अतिरिक्त काम का मिलेगा ओवरटाइम

जबलपुर। रेलवे में पटरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले लाखों ट्रैक मेंटेनर्स और इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। अब मानसून और भारी बारिश के दौरान रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) जैसे संवेदनशील स्थानों पर आठ घंटे की सामान्य शिफ्ट के बाद 4 घंटे की अतिरिक्त सेवा देने पर समयोपरि भत्ता (ओवरटाइम एलाउंस) का भुगतान किया जाएगा। रेलवे के इस निर्णय से देश भर के 3 लाख ट्रैक मेंटेनेंर्स व इंजीनियरिंग स्टाफ को इसका लाभ मिलेगा.

अब मानसून के दौरान कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करने वाले ट्रैक मेंटेनर्स और इंजीनियरिंग स्टाफ इसी वर्ष से इसका लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इस ऐतिहासिक फैसले की शुरुआत उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल से हुई है। जिसके बाद पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर सहित सभी रेल जोनों में इसे क्रियान्वित किया जा रहा है.

एआईआरएफ-यूनियन का काम आया संघर्ष

इस बड़ी जीत की नींव रेलवे यूनियन हैं। एआईआरएफ व डबलूसीआरईयू इसके लिए लगातार मुद्दा उठा रही थी। पीएनएम बैठक में भी यूनियन ने मजबूती से यह मुद्दा उठाया था कि वर्षा ऋतु में रेल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारी अपनी शिफ्ट से कहीं ज्यादा काम कर रहे हैं। इसी क्रम में पश्चिम मध्य रेलवे के मंडलों में भी व्यवस्था क्रियान्वित की जा रही है।

आरयूबी पर अतिरिक्त 4 घंटे की मेहनत का मिलेगा फल

अक्सर देखा जाता है कि मानसून के समय रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) और निचले इलाकों में जलभराव के कारण ट्रेनों का संचालन प्रभावित होता है। इन स्थानों पर तैनात ट्रैक मेंटेनर्स अपनी आठ घंटे की सामान्य ड्यूटी के बाद भी लगातार चार घंटे अतिरिक्त सेवा देते हैं, ताकि पटरियों और अंडरपास से पानी की निकासी सुनिश्चित की जा सके। अब प्रशासन ने इस चार घंटे की अतिरिक्त सेवा को ओवरटाइम की श्रेणी में रखते हुए भुगतान करने का निर्णय लिया है।

पूरे भारत के 17 जोन में लागू होगा नया मॉडल

रेलवे बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, इस व्यवस्था को अब भारतीय रेलवे के सभी 17 जोन में समान रूप से लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक, देश भर के करीब 3 लाख से अधिक ट्रैक मेंटेनर्स इस फैसले के दायरे में आएंगे और उन्हें मानसून ड्यूटी का जायज हक मिलेगा।

पारदर्शी भुगतान प्रक्रिया पर जोर

रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह भुगतान पूरी तरह से पारदर्शी होगा। प्रत्येक कर्मचारी द्वारा किए गए अतिरिक्त घंटों का रिकार्ड मस्टर रोल में दर्ज किया जाएगा और उसी के आधार पर भत्ते की गणना की जाएगी। यह राशि सीधे कर्मचारियों के वेतन के साथ उनके बैंक खातों में जमा की जाएगी, जिससे बिचौलियों या देरी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

3 लाख 20 हजार से अधिक ट्रैक मेंटेनर्स कार्यरत

सांख्यिकी आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग में वर्तमान में लगभग 3 लाख 20 हजार से अधिक ट्रैक मेंटेनर्स कार्यरत हैं। यह रेलवे का सबसे बड़ा कार्यबल है जो सीधे तौर पर ट्रैक सेफ्टी से जुड़ा है। अब तक मानसून ड्यूटी के दौरान इनकी अतिरिक्त मेहनत का कोई स्पष्ट भुगतान रिकार्ड नहीं था, लेकिन अब इस फैसले से इन सभी लाखों परिवारों को सीधा आर्थिक फायदा होगा। मानसून के दौरान जलभराव रोकने के लिए रेलवे विशेष तैयारी करता है। 

24 घंटे निगरानी करते हैं कर्मचारी 

अकेले रेल मंडल में सैकड़ों कर्मचारी केवल आरयूबी और बाढ़ संभावित इलाकों में 24 घंटे निगरानी के लिए तैनात किए जाते हैं। देशभर के सभी मंडलों को मिलाकर यह संख्या करीब 1.5 लाख से 2 लाख कर्मचारियों तक पहुंच जाती है, जिन्हें अब शिफ्ट के अतिरिक्त काम करने पर ओवरटाइम मिलेगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak