करोड़ों का रिंग मैन सिस्टम बना सफेद हाथी, पर्याप्त फंड होने के बावजूद नहीं किया जा रहा कंडक्टर अपग्रेडेशन
जबलपुर। शहर की विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए बनाया गया रिंग मेन सिस्टम विभागीय अधिकारियों की आपसी खींचतान और ईगो की भेंट चढ़ गया है। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने करोड़ों की लागत से इस सिस्टम की अधोसंरचना तैयार की है लेकिन पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों की उदासीनता के कारण बड़ी आबादी को निर्बाध बिजली का लाभ नहीं मिल पा रहा है। तकनीकी रूप से यह स्पष्ट हो चुका है कि जब तक 33 केवी फीडरों का कंडक्टर अपग्रेडेशन नहीं होगा तब तक सुरक्षित बिजली आपूर्ति का सपना अधूरा रहेगा। इस संबंध में वितरण कम्पनी के उच्चाधिकारियों ने अपनी कम्पनी के मैदानी अमले को निर्देश भी दिए,लेकिन वितरण कंपनी के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं जिससे सरकार के करोड़ों रुपए के निवेश पर पानी फिरता नजर आ रहा है। पता नहीं क्यों अपनी कम्पनी के अफसरों की बात मैदानी अमले द्वारा क्यों नहीं सुनी जा रही।
कैसे उड़ीं प्लान की धज्जियां
ट्रांसमिशन नेटवर्क को सशक्त बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा 220 केवी गोरा बाजार सबस्टेशन का निर्माण किया गया था। इस सब-स्टेशन को बनाने का मुख्य लक्ष्य शहर की विद्युत आपूर्ति को अतिरिक्त क्षमता और बैकअप सप्लाई उपलब्ध कराना था। यह प्रोजेक्ट वर्ष 2010 में प्रस्तावित किया गया था ताकि 132 केवी विनोबा भावे सबस्टेशन को एक मजबूत वैकल्पिक सप्लाई मिल सके। आपातकालीन स्थितियों में जब मुख्य लाइन में कोई खराबी आए तो शहर के प्रमुख हिस्सों में अंधेरा न हो इसके लिए यह पूरी योजना तैयार की गई थी। ट्रांसको ने अपना काम पूरा कर लिया लेकिन वितरण कंपनी की लापरवाही से यह महत्वपूर्ण रिंग मेन सिस्टम वर्तमान में केवल सफेद हाथी साबित हो रहा है। यदि वितरण कंपनी के अफसर समन्वय दिखाते तो आज शहर की बड़ी आबादी को ट्रिपिंग और अघोषित बिजली कटौती से राहत मिल चुकी होती।
बिना कंडक्टर अपग्रेडेशन कुछ नहीं होगा
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि रिंग मेन सिस्टम की वास्तविक सफलता 33 केवी फीडरों की क्षमता पर टिकी है। वर्तमान में गोरा बाजार-1 और गोरा बाजार-2 के 33 केवी फीडरों में जो कंडक्टर लगे हैं वे वास्तविक लोड झेलने में सक्षम नहीं हैं। जब भी सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव आता है तो यह फीडर ट्रिप हो जाते हैं जिससे आपूर्ति प्रभावित होती है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट सुझाव दिया है कि यदि इन दोनों फीडरों में उच्च क्षमता वाले पैंथर कंडक्टर लगाए जाएं तो लोड वहन करने की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। पैंथर कंडक्टर लगने से फॉल्ट की संभावनाएं लगभग समाप्त हो जाएंगी और शहरी क्षेत्रों को मिलने वाली बिजली अधिक स्थिर होगी। ट्रांसको के अधिकारियों ने इस तकनीकी सुधार के लिए कई बार वितरण कंपनी को अवगत कराया है लेकिन ईगो के कारण इस तकनीकी आवश्यकता को नजरअंदाज किया जा रहा है।
गर्मी आ रही है,बढ़ेगी परेशानी
हैरानी की बात यह है कि इस अपग्रेडेशन कार्य के लिए फंड की कोई कमी नहीं है। केंद्र सरकार की आरडीएसएस जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के अंतर्गत आवश्यक संसाधन और बजट उपलब्ध है। इसके बावजूद पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों ने कंडक्टर बदलने की प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल रखा है। योजनाबद्ध ढंग से कार्य न होने के कारण गोरा बाजार, रामपुर, कटंगा, घंटाघर, मिशन कंपाउंड और आसपास के क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को बार-बार बिजली संकट का सामना करना पड़ता है। वितरण कंपनी के अफसर इस महत्वपूर्ण परियोजना को प्राथमिकता देने के बजाय पुरानी व्यवस्था को ही खींच रहे हैं। यदि समय रहते 33 केवी कंडक्टर का उन्नयन नहीं किया गया तो आने वाले समय में गर्मी के सीजन में लोड बढ़ने पर शहर का रिंग मेन सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त हो सकता है जिसकी सीधी जिम्मेदारी वितरण कंपनी के अफसरों की होगी।
