जबलपुर। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय महाकोशल कॉलेज में दिव्यांग छात्र-छात्राओं के भविष्य को संवारने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। संस्थान में हेल्प द ब्लाइंड फाऊंडेशन ट्रस्ट चेन्नई के सहयोग से अत्याधुनिक उपकरणों से युक्त कंप्यूटर लैब और स्किल डेवलपमेंट रिसोर्स सेंटर का उद्घाटन किया गया। उद्घाटन समारोह में ट्रस्टी डीके शर्मा, राधाकृष्णन, प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी, दिव्यांग प्रकोष्ठ प्रभारी प्रो. अरुण शुक्ल और डॉ. शिवेन्द्र सिंह परिहार ने सरस्वती पूजन कर केंद्र का संचालन शुरू कराया। यह मध्यप्रदेश का पहला ऐसा महाविद्यालय बन गया है जहां दिव्यांगों के लिए विशिष्ट स्किल डेवलपमेंट रिसोर्स सेंटर स्थापित हुआ है।
आत्मनिर्भरता और कौशल विकास का नया केंद्र
महाकोशल कॉलेज वर्तमान में प्रदेश का ऐसा अग्रणी संस्थान है जहां सबसे अधिक संख्या में दिव्यांग विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस केंद्र की स्थापना का प्राथमिक उद्देश्य इन विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना और उनमें ऐसे कौशल विकसित करना है जो उन्हें रोजगार के योग्य बना सकें। प्रो. अरुण शुक्ल के अनुसार इस रिसोर्स सेंटर के माध्यम से छात्रों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। संस्थान की एक बड़ी विशेषता यह भी है कि यहां अध्ययनरत दिव्यांग विद्यार्थियों की फीस पूरी तरह माफ है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्र भी उच्च शिक्षा और तकनीकी ज्ञान प्राप्त कर पा रहे हैं।
आधुनिक सुविधाएं से लैस लैब
स्किल डेवलपमेंट रिसोर्स सेंटर के अंतर्गत 2 वर्षीय विशेष पाठ्यक्रम का संचालन किया जाएगा। इस कोर्स के दौरान दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को कंप्यूटर संचालन की बारीकियां, कम्युनिकेशन स्किल्स और मोबिलिटी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी विशेष मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। संस्थान और ट्रस्ट के माध्यम से विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप, लैपटॉप और अन्य आवश्यक तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। प्रशिक्षण का पूरा खाका इस तरह तैयार किया गया है कि कोर्स पूरा होने के बाद नेत्रहीन विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्लेसमेंट मिल सके।
व्यावहारिक ज्ञान पर ज्यादा जोर
इस शुभारंभ अवसर पर प्रोजेक्ट से जुड़ी टीम और कॉलेज स्टाफ की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में प्रोग्राम हेड पूजा, टीम लीडर सुहास होल्कर, टेक्निकल ऑफिसर रंजीत सहित डॉ. राजीव मिश्रा, डॉ. राजेश शामकुंवर, डॉ. पुष्पा तनेजा, डॉ. महेन्द्र कुशवाहा और डॉ. तरुणेन्द्र साकेत उपस्थित थे। इन सभी सदस्यों ने केंद्र की कार्यप्रणाली और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। इस दौरान कॉलेज के लगभग 68 दिव्यांग विद्यार्थी भी मौजूद रहे, जिन्होंने नई लैब और संसाधनों का अवलोकन किया। इस स्किल सेंटर के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान न देकर व्यावहारिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर जोर दिया जा रहा है। आधुनिक सॉफ्टवेयर और उपकरणों की मदद से दृष्टिबाधित छात्र अब उन कार्यों को भी आसानी से कर सकेंगे जो पहले उनके लिए चुनौतीपूर्ण थे। प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से उनकी दक्षता बढ़ाकर उन्हें कॉर्पोरेट और सरकारी क्षेत्रों में रोजगार दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। यह केंद्र आने वाले समय में प्रदेश के अन्य संस्थानों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करेगा।

