जबलपुर। शहर गोरखपुर अंतर्गत हवाबाग स्थित प्रगतिशील कॉलोनी में बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पद के दुरुपयोग और उपभोक्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार का मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय निवासी चंद्रशेखर सिंह ने विभाग के उच्च अधिकारियों और पुलिस प्रशासन से इस संबंध में लिखित शिकायत की है। मामले के अनुसार बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता सिटी सर्किल संजय अरोरा ने बिना किसी पूर्व सूचना या वैधानिक नोटिस के उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन काट दिया। यह पूरी कार्रवाई उस समय की गई जब उपभोक्ता पर मात्र 1 या 1.5 माह का ही बिजली बिल बकाया था। इस घटनाक्रम ने विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिना किसी वैधानिक नोटिस के काटी गई बिजली आपूर्ति
प्रगतिशील कॉलोनी निवासी चंद्रशेखर सिंह के अनुसार विभाग की ओर से बिजली काटने से पहले कोई भी औपचारिक सूचना नहीं दी गई थी। नियमानुसार किसी भी उपभोक्ता का कनेक्शन काटने से पहले उसे निर्धारित समय का नोटिस देना अनिवार्य होता है लेकिन इस मामले में नियमों को ताक पर रख दिया गया। हैरानी की बात यह है कि उपभोक्ता का बिल बहुत अधिक समय से लंबित नहीं था बल्कि केवल 1 या 1.5 माह की ही राशि बकाया थी। इसके बावजूद बिजली विभाग की टीम ने अचानक पहुंचकर घर के सभी कनेक्शन विच्छेद कर दिए। उपभोक्ता का आरोप है कि बिजली बिल की राशि विधिवत जमा करने के बाद भी उन्हें राहत देने के बजाय लगातार कार्यालय के चक्कर कटवाए गए जिससे परिवार को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान होना पड़ा।
निजी विवाद को बनाया विभागीय कार्रवाई का आधार
घटना के मूल में विभागीय रंजिश और व्यक्तिगत विवाद की बात सामने आ रही है। चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि कुछ समय पहले कॉलोनी में ही रहने वाले अधीक्षण अभियंता सिटी सर्किल संजय अरोरा के साथ उनकी किसी मामूली बात पर कहासुनी हुई थी। आरोप है कि इसी व्यक्तिगत मामले को आधार बनाकर संजय अरोरा ने अपने पद का दुरुपयोग किया और द्वेषपूर्ण भावना से ग्रसित होकर यह कार्रवाई करवाई। बिजली काटने पहुंचे कनिष्ठ अभियंता गौतम मुखर्जी और अरुण कुमार मालवीय सहित अन्य कर्मचारियों का व्यवहार भी अत्यंत अशोभनीय रहा। अधिकारियों ने न केवल उपभोक्ता के साथ बदतमीजी की बल्कि घर की महिलाओं और बेटी के साथ भी अनुचित भाषा का प्रयोग किया। एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारियों द्वारा इस तरह का व्यवहार उनकी कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
विषम पारिवारिक परिस्थितियों में भी नहीं मिला सहयोग
जिस समय बिजली विभाग द्वारा यह कठोर कार्रवाई की गई उस समय उपभोक्ता का परिवार अत्यंत कठिन दौर से गुजर रहा था। परिवार में गमी होने के कारण शोक का माहौल था और साथ ही घर के बच्चों की वार्षिक परीक्षाएं भी चल रही थीं। इन परिस्थितियों के बारे में अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद उन्होंने किसी भी प्रकार की सहानुभूति या सहयोग नहीं दिखाया। जब उपभोक्ता के दामाद ने इस अवैध कार्रवाई और अभद्र व्यवहार का विरोध किया तो अधिकारियों ने उनके विरुद्ध ही कानूनी एक्शन लेने की धमकी दे डाली। बिल भुगतान की रसीद दिखाने के बाद भी कनेक्शन तत्काल नहीं जोड़ा गया और उपभोक्ता को अनावश्यक रूप से परेशान किया गया जो शासन के नियमों के पूरी तरह खिलाफ है।
पुलिस प्रशासन और उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार
अधिकारियों की इस मनमानी और गुंडागर्दी के खिलाफ चंद्रशेखर सिंह और उनके परिजनों ने अब कानूनी रास्ता अख्तियार किया है। इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत ओमती थाने में दर्ज कराई गई है और दोषियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है। इसके साथ ही पीड़ित पक्ष ने एसपी कार्यालय पहुंचकर पुलिस अधीक्षक को भी ज्ञापन सौंपा है जिसमें पद का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की अपील की गई है। विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी पत्र लिखकर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और ईमानदार उपभोक्ताओं को प्रताड़ित करने वाले कर्मचारियों को दंडित करने का आग्रह किया गया है। परिजनों का कहना है कि यदि व्यक्तिगत कारणों से सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग इसी तरह होता रहा तो आम जनता का प्रशासन पर से विश्वास उठ जाएगा।
