कश्मीर की बेटी का जबलपुर में बयान,घाटी में अब डर नहीं, घर वापसी की जगी उम्मीद: अनुच्छेद 370 के बाद बदली तस्वीर

सुनैना गुलज़ार


पुलवामा की सुनैना ने कहा, कश्मीर में खत्म हुआ दहशत का दौर, अब अपनी जड़ों की ओर लौटेंगे लोग

जबलपुर। जबलपुर में आयोजित छह दिवसीय कश्मीरी-मध्यप्रदेश युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का हाल ही में समापन हुआ। गृह मंत्रालय और खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस 'माय भारत' कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से आए युवाओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान पुलवामा की रहने वाली सुनैना गुलजार ने घाटी के बदलते जमीनी हालातों और अनुच्छेद 370 के हटने के बाद आए सकारात्मक बदलावों पर प्रमुखता से अपनी बात रखी।

मन से भय धीरे-धीरे समाप्त हो रहा 


कार्यक्रम के समापन अवसर पर सुनैना गुलजार ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से कश्मीर के सामाजिक परिवेश में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक फैसले के बाद कश्मीरी पंडितों के मन में एक बार फिर से अपनी जड़ों की ओर लौटने यानी घर वापसी की उम्मीदें जागृत हुई हैं। पहले जो लोग वहां जाने या बसने को लेकर डर और संकोच महसूस करते थे, अब उनके मन से वह भय धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। सुरक्षित वातावरण मिलने से विस्थापित परिवारों में अपनी मातृभूमि पर लौटने का विश्वास बढ़ा है।

​भय का माहौल खत्म, पर्यटन में बढ़ोत्तरी

​सुनैना गुलजार ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि अब कश्मीर की पहचान संघर्ष और अस्थिरता के बजाय शांति और प्राकृतिक सुंदरता के रूप में फिर से स्थापित हो रही है। उन्होंने कहा कि पहले लोग कश्मीर आने से कतराते थे, लेकिन अब लोग बिना किसी हिचक के वहां पहुंच रहे हैं। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से न केवल स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि हुई है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिली है और आम जनजीवन पटरी पर लौट आया है।

​सांस्कृतिक एकता में युवाओं की भूमिका

​छह दिनों तक चले इस विशेष आदान-प्रदान कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच सांस्कृतिक समझ और भाईचारे को मजबूत करना था। समापन समारोह में आयोजकों ने बताया कि ऐसे आयोजनों से देश के विभिन्न क्षेत्रों की परंपराओं और विचारों को समझने का मौका मिलता है। युवा प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश और कश्मीर के बीच इस तरह के संवाद से राष्ट्रीय एकता की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी।


Post a Comment

Previous Post Next Post