छिंदवाड़ा निवासी धनराज सिंह केंद्रीय जेल नरसिंहपुर में सजा काट रहा था। उसे 28 जून 2025 को 16 दिन की पैरोल मिली थी। उसे 13 जुलाई 2025 को जेल में आमद देनी थी। तय समय पर वापस न आने पर जेल अधीक्षक की शिकायत पर थाना स्टेशनगंज में मामला दर्ज किया गया था। फरारी के दौरान आरोपी ने पुलिस को चकमा देने के लिए शातिर तरीके अपनाए। वह स्वयं का मोबाइल नहीं रखता था और परिजनों से बात करने के लिए दूसरों के फोन का इस्तेमाल करता था। वह किसी भी स्थान पर 8.10 दिन से ज्यादा नहीं रुकता था और अपनी पहचान छिपाकर मजदूरी करता था। एसपी के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश व राजस्थान में लगातार दबिश दी। मथुरा-वृंदावन में तलाश के बाद पुलिस को आरोपी के राजस्थान के अलवर जिले में होने की सूचना मिली। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे अलवर रेलवे स्टेशन से उस समय पकड़ा जब वह भागने की फिराक में था। इस गिरफ्तारी में निरीक्षक किशोर वामनकर और उपनिरीक्षक अनिल अजमेरिया की टीम के साथ राजस्थान पुलिस के आरक्षक मानसिंह चौधरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर आगामी वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।