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महाकोशल प्रांत में संघ की नई सांगठनिक व्यवस्था: संभागीय प्रणाली लागू और शाखा विस्तार में बनाया देश के शीर्ष 10 में स्थान



जबलपुर।  विद्यार्थी परिषद कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण पत्रकारवार्ता के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महाकोशल प्रांत के संघचालक डॉ प्रदीप दुबे ने संघ के आगामी सांगठनिक परिवर्तनों और विस्तार योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि हरियाणा के समालखा में 13, 14 और 15 मार्च 2026 को आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष को ध्यान में रखते हुए कई दूरगामी निर्णय लिए गए हैं। इस बैठक में देशभर से कुल 1493 कार्यकर्ताओं को अपेक्षित किया गया था जिनमें से 1438 कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बैठक के दौरान सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। सांगठनिक ढांचे को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए संघ के कार्यों के विकेंद्रीकरण पर जोर दिया गया है जिसके तहत नई व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं।

​सांगठनिक विकेंद्रीकरण और नवीन संभागीय प्रणाली 

संघ के कार्य विस्तार को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए महाकोशल प्रांत में संभाग प्रणाली को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है। डॉ प्रदीप दुबे ने स्पष्ट किया कि सांगठनिक दृष्टि से महाकोशल प्रांत के अंतर्गत कुल 34 जिले आते हैं। प्रशासनिक सुगमता और कार्यों के बेहतर प्रबंधन के लिए अब इन जिलों को तीन अलग-अलग संभागों में विभाजित किया गया है। विकेंद्रीकरण की इस प्रक्रिया से निचले स्तर तक संघ की गतिविधियों की निगरानी और क्रियान्वयन में तेजी आएगी। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में संघ ने अपनी सांगठनिक संरचना को और अधिक जमीनी स्तर तक ले जाने का संकल्प लिया है जिसमें संभाग प्रणाली की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

 वर्ष में शाखा विस्तार और आगामी सांगठनिक लक्ष्य 

शाखा विस्तार के मामले में महाकोशल प्रांत ने देश के शीर्ष दस प्रांतों में अपना स्थान बनाया है। देशभर में पिछले एक वर्ष के दौरान संघ की लगभग 6000 नई शाखाओं की वृद्धि हुई है। इसमें अकेले महाकोशल प्रांत में 533 नई शाखाएं बढ़ी हैं जिसके बाद प्रांत में कुल शाखाओं की संख्या अब 3078 तक पहुंच गई है। संघ का आगामी लक्ष्य प्रत्येक बस्ती और मंडल स्तर तक पहुंचना है। महाकोशल प्रांत में 2500 से अधिक मंडल चिन्हित किए गए हैं। संघ की योजना अगले डेढ़ वर्ष के भीतर इन सभी मंडलों और बस्तियों में नियमित शाखाएं प्रारंभ करने की है। इसके अतिरिक्त शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की श्रृंखला में 15 अप्रैल से 15 मई के बीच प्रमुख प्रबुद्धजनों की गोष्ठियों का आयोजन भी किया जाएगा।

​जनसंपर्क अभियान और गृह संपर्क के व्यापक आंकड़े -

देशभर में चलाए गए गृह संपर्क अभियान के अंतर्गत संघ के स्वयंसेवकों ने व्यापक स्तर पर परिवारों से संपर्क साधा है। अब तक संपन्न हुए 46 प्रांतों में से 37 प्रांतों के डेटा के अनुसार 3,89,465 ग्रामों और नगरीय क्षेत्रों की 31,141 बस्तियों के 10,02,12,161 घरों तक पहुंच बनाई गई है। महाकोशल प्रांत के संदर्भ में यह अभियान अत्यंत सफल रहा है जहां स्वयंसेवकों ने 20,483 गांवों और शहरी क्षेत्रों की 933 बस्तियों में स्थित 43,49,923 घरों में प्रत्यक्ष संपर्क किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को संघ के विचारों और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ना रहा है।

​हिंदू सम्मेलनों में मातृशक्ति और युवाओं की सहभागिता 

सामाजिक एकजुटता के उद्देश्य से आयोजित हिंदू सम्मेलनों में भी भारी जनसमूह उमड़ा है। राष्ट्रीय स्तर पर 37 प्रांतों में संपन्न सम्मेलनों में ग्रामीण क्षेत्रों के 23,141 मंडल सम्मेलन और नगरीय क्षेत्रों के 13,905 बस्ती सम्मेलन पूरे हुए हैं। इन आयोजनों में कुल 3,49,35,211 लोग शामिल हुए जिनमें 1,55,95,124 महिलाएं और 1,93,40,087 पुरुष सम्मिलित रहे। महाकोशल प्रांत में कुल 23,48,042 लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के 2178 मंडल और नगरीय क्षेत्रों के 863 बस्ती सम्मेलन शामिल रहे। प्रांत के इन आयोजनों में 9,87,326 महिलाओं और 14,57,495 पुरुषों ने हिस्सा लिया। विशेष रूप से जबलपुर महानगर के कृषि भाग की सुहागी बस्ती में आयोजित सम्मेलन में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की गरिमामयी उपस्थिति रही जिसमें 4500 लोग सहभागी बने।

​गुरु तेगबहादुर का शहीदी वर्ष और स्मृति कार्यक्रम -

यह वर्ष सिख गुरु तेगबहादुर की शहादत का 350 वां वर्ष है जिसे संघ पूरे देश में श्रद्धापूर्वक मना रहा है। उनके बलिदान को स्मरण करने हेतु देश भर में अब तक 2,134 विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है। इसी क्रम में संस्कारधानी जबलपुर में भी एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें 500 से अधिक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में सहसरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर का उद्बोधन प्राप्त हुआ जिन्होंने गुरु तेगबहादुर के जीवन और उनके धर्म रक्षक स्वरूप पर प्रकाश डाला। इस पत्रकार वार्ता को डॉ प्रदीप दुबे के साथ प्रांत प्रचार प्रमुख विनोद कुमार ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विभाग प्रचार प्रमुख विनय सोलंकी सहित प्रचार टोली के अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

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