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मदन महल पहाड़ी के अब तक 102 अवैध निर्माण ध्वस्त

 


जबलपुर। मदन महल पहाड़ी से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया निरंतर जारी है। बुधवार को इस अभियान का पांचवा दिन रहा। भीषण गर्मी और तेज धूप के प्रभाव के कारण पांचवे दिन कार्रवाई की गति कुछ धीमी रही, जिसके चलते केवल 17 अतिक्रमण ही हटाए जा सके। इस मुहिम में जुटे श्रमिकों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जेसीबी मशीनें नहीं पहुंच पा रही हैं, वहां पक्के मकानों को मैन्यूल तरीके से यानी हाथों से तोड़ना पड़ रहा है। लगातार पांच दिनों से काम कर रहे मजदूर भी इस कठिन परिस्थिति में थके हुए नजर आए। पक्के निर्माणों को ढहाने में अत्यधिक शारीरिक श्रम की आवश्यकता हो रही है जिससे कार्य की गति प्रभावित हुई है।

​सुको के आदेश पर 715 निर्माण चिन्हित

​यह पूरी कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों के पालन में की जा रही है। जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने मदन महल पहाड़ी क्षेत्र में कुल 715 अतिक्रमणों को चिन्हित किया है जिन्हें पूरी तरह जमींदोज किया जाना है। पांच दिनों की निरंतर कार्रवाई के बाद अब तक कुल 102 अवैध निर्माण हटाए जा चुके हैं। प्रशासन का लक्ष्य पहाड़ी को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त कराकर उसे उसके मूल स्वरूप में लौटाना है। शेष बचे हुए निर्माणों को हटाने के लिए आगामी दिनों में कार्ययोजना के अनुसार कार्रवाई को और विस्तार दिया जाएगा। न्यायालय के सख्त रुख के कारण प्रशासनिक अमला किसी भी प्रकार की ढील देने के मूड में नहीं है।

​झोपड़ियों से पक्के मकानों में तब्दील हुए निर्माण

​पहाड़ी पर बसे लोगों ने शुरुआत में कच्चे निर्माण और झोपड़ियां बनाई थीं, लेकिन समय बीतने के साथ इन्हें व्यवस्थित पक्के मकानों का रूप दे दिया गया। अधिकारियों के अनुसार करीब 20 फीसदी अतिक्रमणकारियों ने यहां सीमेंट और कंक्रीट के मजबूत घर बना लिए थे। कुछ मकानों की स्थिति ऐसी थी कि वहां बाकायदा पक्के निर्माण के साथ सामने आंगन और बगीचे भी विकसित कर लिए गए थे। प्रशासनिक अमले ने इन बगीचों और आंगन वाले हिस्सों को तोड़ दिया है। पहाड़ी के दुर्गम रास्तों और ऊंचाई पर बने इन पक्के निर्माणों को तोड़ना दल के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है क्योंकि वहां भारी मशीनरी ले जाना संभव नहीं है।

​बस्ती में मिली पक्की सड़कें,बिजली भी पर्याप्त

​अतिक्रमण की श्रेणी में होने के बावजूद इस अवैध बस्ती में सुविधाओं का विस्तार शहरी क्षेत्रों की तरह था। यहां रहने वाले लोगों के पास बुनियादी सुविधाओं का कोई अभाव नहीं था। पहाड़ी के भीतर तक पक्की सड़कों का जाल बिछा हुआ था। इसके अलावा सरकारी नलों के माध्यम से नियमित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की गई थी और सभी घरों में विद्युत कनेक्शन भी प्रदान किए गए थे। इन्ही पक्की सड़कों और बुनियादी ढांचे के बीच बसे इन अवैध निर्माणों को अब चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है ताकि पहाड़ी के प्राकृतिक परिवेश को संरक्षित किया जा सके। प्रशासनिक अधिकारी पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं।

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