GST का बड़ा एक्शन: तीन जिलों में छापे, कागजी फर्मों से चल रहा था करोड़ों का खेल


कोयले के फर्जी बिलों के जरिए लगाया जा रहा था सरकार को चूना

जबलपुर। सीजीएसटी आयुक्तालय जबलपुर ने टैक्स चोरी के खिलाफ एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। शनिवार को विभाग की टीमों ने सीधी, सतना और कटनी में एक साथ 9 संदिग्ध फर्मों पर धावा बोला। इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र के व्यापारियों में खलबली मचा दी है। शुरुआती तफ्तीश इशारा कर रही है कि यह पूरा खेल करोड़ों रुपये की फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट  को भुनाने के लिए रचा गया था।

ग्राउंड जीरो पर हकीकत: कागजों पर दफ्तर, जमीन पर सन्नाटा

​विभागीय आयुक्त लोकेश लिल्हारे को खुफिया जानकारी मिली थी कि कुछ फर्में केवल कागजों पर चल रही हैं। जब टीमें जांच के लिए पहुंचीं, तो नतीजे हैरान करने वाले थे। 9 में से 8 फर्में अपने रजिस्टर्ड पते पर मिली ही नहीं। कहीं कोई ऑफिस नहीं था और न ही व्यापार का कोई नामोनिशान। अधिकारियों के मुताबिक, इन 'शेल कंपनियों' का इस्तेमाल सिर्फ सरकारी खजाने में सेंध लगाने के लिए किया जा रहा था।

कोयले के फर्जी व्यापार से उपजा अवैध क्रेडिट का जाल

​जांच में यह बात सामने आई है कि इन फर्मों ने कोयले की खरीद-बिक्री के झूठे बिल तैयार किए। इन फर्जी बिलों के आधार पर करोड़ों की बोगस आईटीसी जनरेट की गई और उसे दूसरी फर्मों को ट्रांसफर कर दिया गया। टीम ने सीधी की श्री बालाजी एसोसिएट, महादेव ट्रेडर्स, मिश्रा ट्रेडिंग, गायत्री एंटरप्राइजेज और आदित्य फिलिंग स्टेशन, ​कटनी की जय श्री बालाजी कोल ट्रेडर्स और कुमार ट्रेडिंग कंपनी और सतना: रिशाल एसोसिएट्स और भव्यंश सेल्स एंड लॉजिस्टिक्स में कार्रवाई की है। 

खंगाले जा रहे हैं ई-वे बिल और बैंक खाते

​विभाग अब इन फर्मों के बैंकिंग ट्रांजेक्शन, जीएसटी रिटर्न और ई-वे बिलों का बारीकी से मिलान कर रहा है। आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया है कि राजस्व की चोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में इस जांच की आंच कुछ और बड़े व्यापारिक घरानों तक पहुंच सकती है। विभाग का कहना है कि यह तो बस शुरुआत है, आने वाले समय में और भी बड़े खुलासे होने तय हैं।

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