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सतत् जीवन शैली विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है: प्रो. अरुण शुक्ल


जबलपुर
। शासकीय महाविद्यालय, गढ़ा में पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत 6 दिवसीय कार्यशाला “सतत् जीवन शैली” का उत्साहपूर्वक शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और समाज को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना और भविष्य के लिए संसाधनों के संरक्षण पर जोर देना है।कार्यक्रम में डॉ. विभा निगम (वरिष्ठ प्राध्यापक, अर्थशास्त्र), डॉ. तृप्ति उकास (प्रशासनिक अधिकारी), और डॉ. संघप्रिया तिवारी (लाइब्रेरियन) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों द्वारा इस अवसर पर एक विशेष स्मारिका का विमोचन किया गया।

सतत् जीवन शैली: विकल्प नहीं, अनिवार्य आवश्यकता

​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. अरुण शुक्ल (विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, पीएमश्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस महाकौशल महाविद्यालय) ने अपने संबोधन में कहा कि "सतत् जीवन शैली अब मात्र एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारी अनिवार्य आवश्यकता बन गई है। यदि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, स्वस्थ और सुंदर पृथ्वी छोड़ना चाहते हैं, तो हमें 'कम उपभोग और अधिक संरक्षण' के सिद्धांत को अपनाना होगा।" उन्होंने आह्वान किया कि हमें स्वयं भी इस जीवन शैली को अपनाना चाहिए और दूसरों को भी इसके लिए निरंतर प्रेरित करना चाहिए। कार्यशाला का आयोजन प्राचार्य डॉ. मनीषा कोल के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की प्रभारी डॉ. प्रतिभा उरमलिया रहीं, जबकि मंच का सफल संचालन डॉ. रंजना जैन द्वारा किया गया। इस अवसर पर विवेक चौबे (क्रीड़ा अधिकारी), डॉ. रीना सोनी, डॉ. सोनमती विश्वकर्मा, डॉ. पायल श्रीवास्तव, डॉ. स्वाति मिश्रा सहित महाविद्यालय के लगभग 30 विद्यार्थी एवं स्टाफ उपस्थित रहा।

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