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अजब मामला: भूत नहीं चाहते श्मशान में मुर्दों को जलाया जाये!


जबलपुर।
विकास की बड़ी-बड़ी बातों के बीच पनागर जनपद की ग्राम पंचायत महगवां टगर से भ्रष्टाचार और अंधविश्वास का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ पंचायत के जिम्मेदारों ने सरकारी राशि के गबन को छिपाने के लिए 'भूतों' का सहारा लिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच और सचिव ने श्मशान घाट के निर्माण कार्य को यह कहकर रोक दिया कि वहां भूतों का डेरा है और वे निर्माण नहीं होने दे रहे हैं।

बिना निर्माण के निकाल ली गई राशि

​सूचना के अधिकार  से मिली जानकारी ने पंचायत के दावों की पोल खोल दी है। दस्तावेजों के अनुसार, श्मशान घाट में शेड, चबूतरा और अन्य सुविधाओं के निर्माण के लिए स्वीकृत की गई राशि लगभग दो साल पहले ही निकाल ली गई थी। कागजों में पैसा खर्च हो चुका है, लेकिन धरातल पर एक ईंट भी नहीं लगाई गई। जब ग्रामीणों ने निर्माण न होने का कारण पूछा, तो सरपंच रणजीत सिंह ठाकुर, सचिव विनोद तिवारी और सहायक सचिव ने कथित तौर पर यह हास्यास्पद तर्क दिया कि श्मशान के भूत काम करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं।

भ्रष्टाचार छिपाने अंधविश्वास की आड़

​ग्रामीणों का कहना है कि यह भूतों का डर नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को दबाने की एक सोची-समझी साजिश है। श्मशान घाट में न तो अंतिम संस्कार के लिए पक्का प्लेटफॉर्म है और न ही बारिश से बचने के लिए शेड। स्थिति इतनी दयनीय है कि बरसात के मौसम में शवों का अंतिम संस्कार करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि अब जब जांच की बात शुरू हुई है, तो पंचायत स्तर पर अन्य योजनाओं के बजट को जोड़-तोड़ कर यहां निर्माण दिखाने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में उपयंत्री और सहायक यंत्री की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।

सीईओ ने बिठाई जांच, कार्रवाई की तैयारी

​मामले की गंभीरता और ग्रामीणों की शिकायत को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी आयुषी उपाध्याय ने बताया कि महगवां टगर पंचायत के श्मशान घाट निर्माण में अनियमितता की शिकायत प्राप्त हुई है। इस संबंध में जनपद स्तर पर एक जांच कमेटी गठित कर दी गई है। टीम मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करेगी और तकनीकी रिपोर्ट तैयार करेगी। सीईओ के अनुसार, यदि वित्तीय अनियमितता और गबन की पुष्टि होती है, तो संबंधित सरपंच और सचिव के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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