चौंकाने वाली रिपोर्ट, 1973 के बाद बाघों की सबसे ज्यादा मौतें 2025 में


जबलपुर। 
मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतों के मामले में हाई कोर्ट के निर्देश पर फील्ड डायरेक्टर ने स्टेटस रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि महज ढाई महीने (21 नवंबर से 2 फरवरी) के भीतर 8 बाघों की जान जा चुकी है। कोर्ट ने अब इस रिपोर्ट पर याचिकाकर्ताओं से जवाब मांगते हुए अगली सुनवाई की तारीख 25 मार्च तय की है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल 8 मौतों में से 4 बाघों की मौत टाइगर रिजर्व के भीतर हुई, जिसे 'प्राकृतिक' बताया गया है। वहीं, रिजर्व के बाहर सामान्य वन क्षेत्रों में हुई अन्य 4 बाघों की मौत का कारण 'करंट' लगना पाया गया है। हालांकि, विभाग का दावा है कि मृत बाघों के अवशेष सुरक्षित मिले हैं। वन विभाग ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि संवेदनशील इलाकों में बिजली लाइनों को सुरक्षित करने और वन्यजीव मानकों के पालन के लिए विद्युत विभाग को पत्राचार किया गया है।

​क्यों बाघों के लिए सबसे घातक साबित हुआ साल 2025

​वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे द्वारा दायर जनहित याचिका में प्रदेश में बाघों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश में बाघों की मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। साल 2022 में 43, 2023 में 45 और 2024 में 46 बाघों की मौत हुई थी। लेकिन साल 2025 अब तक का सबसे घातक वर्ष रहा, जिसमें रिकॉर्ड 54 बाघों की जान गई। यह आंकड़ा 1973 में 'प्रोजेक्ट टाइगर' की शुरुआत के बाद से अब तक का सबसे अधिक है। साल 2026 की शुरुआत भी चिंताजनक रही है, जहाँ पहले ही हफ्ते में 6 बाघ दम तोड़ चुके हैं।

​निगरानी तंत्र व इंटेलिजेंस की विफलता पर सवाल

​याचिका में आरोप लगाया गया है कि वन विभाग अक्सर बाघों की मौत की वजह 'आपसी संघर्ष' बताकर पल्ला झाड़ लेता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में बाघों के साथ-साथ बड़ी संख्या में तेंदुए भी शिकारियों का निशाना बन रहे हैं। शिकारी रिजर्व के आसपास और बफर क्षेत्रों में बिजली के तारों का जाल बिछा रहे हैं, जिससे बाघों की मौत हो रही है। याचिका में सीधे तौर पर वन विभाग के सर्विलांस और इंटेलिजेंस सिस्टम को विफल बताया गया है। संदिग्ध और रहस्यमयी परिस्थितियों में हो रही इन मौतों ने 'टाइगर स्टेट' के खिताब पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।

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