नई दिल्ली। मृतक आश्रित और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले रेल कर्मचारियों और उनके आश्रितों का उपचार नए चिकित्सा कार्ड जारी होने तक रोकने को रेलवे बोर्ड ने अमानवीय माना है। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में आल इंडिया रेलवेमैंस फेडरेशन (एआईआरएफ) ने रेलवे बोर्ड को पत्र लिखकर विसंगतियों के दूर करके राहत दिये जाने की मांग की थी.
रेलवे बोर्ड के स्वास्थ्य निदेशक डॉ. आशुतोष गर्ग ने सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों को इस संबंध में निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि मृतक आश्रित एवं सेवानिवृत्त कर्मचारी उदार स्वास्थ्य योजना के तहत नए कार्ड बनने तक आवश्यक होने पर सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति लेकर उनके पाल्य का उपचार जारी रखा जाए। बोर्ड ने 13 अक्टूबर, 2003 के अपने पूर्व आदेश का हवाला देते हुए याद दिलाया कि सेवा के दौरान मृत कर्मचारियों के आश्रितों को भी चिकित्सा कार्ड जारी होने तक मानवीय आधार पर इलाज देने का निर्देश प्रभावी है। अब यही व्यवस्था स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों पर भी लागू होगी।
रेलवे बोर्ड ने प्रमुख मुख्य चिकित्सा निदेशकों और प्रमुख मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को भेजे पत्र में साफ किया है कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्मचारियों को चिकित्सा कार्ड जारी होने तक चिकित्सा सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता। यदि आवश्यक हो तो सक्षम प्राधिकारी की अनुमति लेकर अंतराल अवधि में इलाज जारी रखा जाए, ताकि किसी भी कर्मचारी या उसके परिजन को चिकित्सा संकट का सामना न करना पड़े।
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारी उदार स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत चिकित्सा कार्ड जारी होने में देरी के कारण कई मामलों में इलाज प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। रेलवे बोर्ड की नई व्यवस्था में कर्मचारियों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
रेलवे बोर्ड ने सभी इकाइयों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और उपचार में किसी भी स्तर पर बाधा न आने देने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के तत्काल बाद रेलकर्मियों व उनके आश्रितों को मेडिकल की सुविधा नहीं मिल पाती है। नया उम्मीद कार्ड बनने आदि प्रक्रिया पूरी करने में महीनों लग जाते हैं। ऐसे में सेवानिवृत्त रेलकर्मियों व उनके आश्रितों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। बोर्ड की नई गाइडलाइन जारी होने के बाद रेलकर्मियों में खुशी है।
