नर्मदा, गौर और परियट किनारे की डेयरियों पर संकट, शिफ्टिंग न करने वालों पर होगा केस


नर्मदा, गौर और परियट किनारे संचालित डेयरियों को हटाने की मांग, एनजीटी में याचिका दायर

जबलपुर। जबलपुर में नर्मदा और उसकी सहायक नदियों,परियट व गौर को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की गई है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे का तर्क है कि अनिवार्य नीति के तहत नदियों के 500 मीटर के दायरे में डेयरियों का संचालन प्रतिबंधित है, फिर भी नियमों का उल्लंघन धड़ल्ले से हो रहा है। याचिकाकर्ता के वकील प्रभात यादव ने बताया कि 28 जनवरी, 2026 को एनजीटी ने अपने 9 साल पुराने आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए थे। वर्तमान स्थिति यह है कि नर्मदा के किनारे 25, परियट के पास 40 और गौर नदी के किनारे 12 डेयरियां संचालित हैं। ताज्जुब की बात यह है कि डेयरी स्टेट खमरिया का उद्घाटन 24 फरवरी, 2022 को होने के बावजूद इन डेयरियों को वहां शिफ्ट नहीं किया गया। राज्य सरकार ने भी 'नर्मदा सेवा यात्रा मिशन' के दौरान यह स्वीकार किया था कि इन डेयरियों के अपशिष्ट से नदियों का जल गंभीर रूप से प्रदूषित हो रहा है।

स्वतंत्र समिति से जांच की मांग

​अधिवक्ताओं ने एनजीटी से आग्रह किया है कि एक विशेष समिति का गठन किया जाए। यह समिति इस बात की गहन जांच करे कि 'नर्मदा सेवा यात्रा मिशन' के तहत अब तक नदियों के संरक्षण और उन्हें प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए धरातल पर कितना कार्य हुआ है। याचिका में यह मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है कि जिन डेयरी संचालकों को खमरिया डेयरी स्टेट में शिफ्ट होने के लिए नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन उन्होंने अब तक आदेश का पालन नहीं किया है, उनके विरुद्ध आपराधिक मामले (एफआईआर) दर्ज किए जाएं। नौ वर्षों की लंबी प्रतीक्षा और अदालती आदेशों की अवहेलना को देखते हुए अब सख्त कार्रवाई की आवश्यकता जताई गई है।

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