रेलवे में दोहरा मापदंड क्यों? अन्य जोनों में महिलाओं को राहत, तो जबलपुर पमरे में फाइलों में क्यों अटका है हक


मज़दूर संघ ने कैडर बदलने के लिए 
खोला मोर्चा

जबलपुर। वेस्ट सेंट्रल रेलवे मज़दूर संघ ने पश्चिम मध्य रेलवे की महिला ट्रैक मेंटेनर्स की समस्याओं को लेकर एक महत्वपूर्ण मोर्चा खोल दिया है। संघ द्वारा महाप्रबंधक  को लिखे पत्र में महिला रेलकर्मियों के लिए एक बारगी कैडर परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू करने की पुरजोर मांग की गई है। संघ ने अवगत कराया है कि जबलपुर, भोपाल और कोटा मंडलों में कार्यरत महिला ट्रैक मेंटेनर्स को कार्यस्थल पर भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहां न तो शौचालय की व्यवस्था है और न ही चेंजिंग रूम या पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं। इन विषम परिस्थितियों के बावजूद महिलाएं निरंतर सेवा दे रही हैं, लेकिन अब वे अन्य विभागों में स्थानांतरण की उम्मीद कर रही हैं।

​संघ ने अन्य जोनों का दिया हवाला

मज़दूर संघ के महासचिव अशोक शर्मा ने पत्र में तर्क दिया है कि जब मध्य रेलवे (भुसावल, पुणे), पश्चिम रेलवे (भावनगर, रतलाम) और नॉर्दर्न रेलवे में महिला ट्रैक मेंटेनर्स के कैडर परिवर्तन की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सकती है, तो जबलपुर ज़ोन में इसमें देरी क्यों? पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इसके लिए मंडल रेल प्रबंधक  सक्षम अधिकारी हैं और नियमों में भी कोई बाधा नहीं है। संघ का मानना है कि यदि जल्द ही कोटा, जबलपुर और भोपाल मंडलों में कैडर परिवर्तन के आदेश जारी होते हैं, तो यह न केवल रेल परिचालन के लिए बेहतर होगा बल्कि महिला कर्मचारियों के साथ न्याय भी सुनिश्चित करेगा।

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