मौखिक माफी काफी नहीं, हलफनामा दें: हाईकोर्ट ने जज से बदतमीजी करने वाले वकील को दी नसीहत


जबलपुर
। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से सामने आए कोर्ट की अवमानना के एक मामले में अधिवक्ता उमेश जैन ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी मांग ली है। यह मामला भैंसदेही में पदस्थ सिविल जज महेंद्र सिंह मेहसन के साथ की गई अभद्रता से जुड़ा है। सिविल जज ने हाईकोर्ट को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि 28 अक्टूबर 2025 को सुनवाई के दौरान वकील ने उन पर व्यक्तिगत टिप्पणी की और अमर्यादित व्यवहार किया। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस मामले को कोर्ट की गरिमा से जुड़ा बताते हुए बेहद गंभीर माना। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि केवल मौखिक माफी से काम नहीं चलेगा, बल्कि वकील को अपनी गलती स्वीकार करते हुए शपथपत्र के साथ लिखित माफीनामा पेश करना होगा।

​कोर्ट की गरिमा सर्वोपरि: हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

​सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सिविल जज की शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया था कि यदि ऐसे व्यवहार पर दंड नहीं दिया गया, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा। कोर्ट ने माना कि यह मामला सीधे तौर पर न्यायिक संस्था के सम्मान से जुड़ा है, इसलिए माफी की प्रक्रिया पूरी तरह औपचारिक और लिखित होनी चाहिए।

​लिखित माफीनामे के लिए मिला एक दिन का समय

​अधिवक्ता उमेश जैन ने मंगलवार को कोर्ट में पेश होकर अपनी गलती के लिए पछतावा जताया। हालांकि, लिखित माफीनामा और हलफनामा दाखिल करने के लिए उन्होंने अदालत से समय की मांग की। कोर्ट ने उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए एक दिन की मोहलत दी है। अब बुधवार को अधिवक्ता द्वारा शपथपत्र के साथ लिखित माफीनामा प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद कोर्ट मामले में आगे का निर्णय लेगा।

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