जबलपुर। जबलपुर सहित प्रदेश के सभी जिलों में आज वकीलों ने न्यायिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार कर दिया है। यह हड़ताल शिवपुरी जिले के करैरा में एक वरिष्ठ अधिवक्ता की निर्मम हत्या के विरोध में बुलाई गई है। स्टेट बार काउंसिल के आह्वान पर प्रदेश भर के करीब एक लाख से अधिक अधिवक्ता इस प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं, जिससे हाई कोर्ट और जिला अदालतों में कामकाज पूरी तरह ठप पड़ गया है।
शिवपुरी में अधिवक्ता की हत्या से फैला आक्रोश
घटना शिवपुरी जिले की है, जहां वरिष्ठ अधिवक्ता संजय सक्सेना की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने कानूनी जगत में सुरक्षा को लेकर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। वकीलों का आरोप है कि प्रदेश में अधिवक्ताओं पर हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे वे भय के माहौल में काम करने को मजबूर हैं। जबलपुर में वकीलों ने एक विशाल रैली निकाली और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। वकीलों का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, वे शांत नहीं बैठेंगे।
मुआवजे और एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग
विरोध प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रमुख रूप से मृतक अधिवक्ता के परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की गई है। इसके साथ ही, वकीलों ने लंबे समय से लंबित 'एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट' को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग दोहराई है। वकीलों का तर्क है कि यदि यह कानून लागू होता है, तो उन्हें कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी और अपराधियों में कानून का भय होगा।
