जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन और उनके हक के भुगतान में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायाधीश द्वारकाधीश बंसल की एकलपीठ ने जबलपुर नगर निगम के आयुक्त को आगामी 23 फरवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि 14 अगस्त 2024 के मूल आदेश का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो अवमानना प्रकरण में आयुक्त की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।
यह पूरा मामला नगर निगम के उन पूर्व कर्मचारियों से जुड़ा है जो पिछले 4 से 6 वर्षों से अपनी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। गौरतलब है कि नगर निगम ने हाई कोर्ट के पूर्व आदेश के खिलाफ रिट अपील और फिर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी, लेकिन दोनों ही जगहों से निगम की याचिकाएं खारिज कर दी गईं। वर्तमान में निगम की एक पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) हाई कोर्ट में लंबित है। आज हुई सुनवाई के दौरान वकीलों की हड़ताल के चलते बुजुर्ग कर्मचारी और दिवंगत कर्मचारियों की विधवाएं स्वयं कोर्ट में पेश हुईं। उन्होंने रोते हुए अपनी पीड़ा सुनाई कि कई साथियों की मृत्यु हो चुकी है और वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि निगम प्रशासन वकीलों और अदालती कार्रवाइयों पर लाखों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों का भुगतान नहीं कर रहा। कोर्ट ने इस मानवीय पक्ष को गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले रिव्यू पिटीशन का निराकरण किया जाए, अन्यथा आयुक्त को खुद आकर जवाब देना होगा।
