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पश्चिम मध्य रेल में डिजिटल तकनीक से कैशलेस ट्रांजेक्शन को मिल रहा बढ़ावा

जबलपुर. रेल यात्रियों को अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से कैशलेस ट्रांजेक्शन सुविधा की उपयोगिता को निरंतर बढ़ाने के लिए भारतीय रेल प्रयत्नशील है। इसी कड़ी में पश्चिम मध्य रेल द्वारा भी यात्रियों को सुविधाजनक, सुरक्षित और आधुनिक भुगतान विकल्प उपलब्ध कराने हेतु विभिन्न डिजिटल माध्यमों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

 पश्चिम मध्य रेल के तीनों मंडलों जबलपुर, भोपाल एवं कोटा में पीआरएस काउंटर्स, यूटीएस काउंटर्स तथा पार्सल कार्यालयों में पीओएस मशीनों के माध्यम से कैशलेस भुगतान की सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही यात्रियों को यूपीआई/भीम एवं मोबाइल टिकटिंग जैसे डिजिटल माध्यमों से टिकट खरीदने और भुगतान करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

 चालू वित्तीय वर्ष के जनवरी माह में पश्चिम मध्य रेल ने पीआरएस एवं यूटीएस के माध्यम से 09 लाख 77 हजार 401 यात्रियों से 11 करोड़ 58 लाख 04 हजार 215 रुपये का कैशलेस ट्रांजेक्शन के माध्यम से रेलवे राजस्व अर्जित किया है, जिसमें कॉम्प्यूटरीकृत आरक्षण प्रणाली में लगी पीओएस मशीनों से 10,22,235 एवं यूपीआई/भीम ऐप से 4,80,25,395 राजस्व अर्जित किया है। इसी प्रकार यूटीएस (अनारक्षित टिकट प्रणाली) में मोबाइल टिकटिंग से 1,00,42,150 एवं यूपीआई/भीम ऐप से 5,67,14,435 राजस्व अर्जित किया है। 

डिजिटल भुगतान के लाभ

 डिजिटल ऑनलाइन भुगतान प्रणाली से यात्रियों को नकद ले जाने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, जिससे समय की बचत और लेन-देन की पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। रेलवे द्वारा उपयोग किए जा रहे सभी डिजिटल भुगतान मोड एन्क्रिप्शन और डेटा प्रमाणीकरण के विभिन्न स्तरों के माध्यम से पूर्णत: सुरक्षित बनाए गए हैं। पश्चिम मध्य रेल अपने सभी तीनों मंडलों जबलपुर, भोपाल एवं कोटा में डिजिटल भुगतान प्रणाली को और अधिक सशक्त एवं सुलभ बनाने हेतु निरंतर प्रयासरत है। आगामी समय में और भी अधिक यात्रियों को कैशलेस ट्रांजेक्शन की सुविधा से जोडऩे के लिए जागरूकता और तकनीकी विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


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