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| 17 फरवरी को निकाला गया खसरा |
रेप के आरोपी उत्तम स्वामी का जबलपुर आश्रम निकला अवैध, कृषि भूमि पर बिना डायवर्शन खड़ा किया साम्राज्य
जबलपुर। दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोपों में घिरे हाई-प्रोफाइल संत उत्तम स्वामी की मुश्किलें अब कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा खुलासे ने जिला प्रशासन और राजस्व विभाग में हड़कंप मचा दिया है। जबलपुर के हीरापुर बंधा गांव स्थित उत्तम स्वामी का आलीशान आश्रम पूरी तरह नियमों को ताक पर रखकर बनाया गया है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, जिस जमीन पर पक्का निर्माण खड़ा है, वह आज भी राजस्व दस्तावेजों में 'कृषि भूमि' के रूप में दर्ज है। बिना लैंड डायवर्शन (व्यपवर्तन) और भवन अनुमति के किया गया यह निर्माण अब जिला प्रशासन की रडार पर है। 17 फरवरी को लोक सेवा केंद्र से जारी सत्यापित खसरा रिपोर्ट ने इस अवैध निर्माण की पोल खोल दी है। राजस्व नियमों के मुताबिक, कृषि मद की भूमि पर बिना डायवर्शन के किसी भी तरह का गैर-कृषि या पक्का निर्माण पूर्णतः अवैध की श्रेणी में आता है। अब तक राजनीतिक रसूख और प्रभाव के चलते अधिकारी इस ओर आंखें मूंदे रहे, लेकिन मामला सुर्खियों में आने के बाद अब जांच का पहिया घूमने लगा है।
नियमों की अनदेखी:किसी से नहीं ली परमिशन
हैरानी की बात यह है कि खसरा नंबर 46/1 के कॉलम नंबर 10 में आज भी इस जमीन पर 'जायद' फसल के रूप में 'उड़द' की खेती होना दर्शाया गया है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि यहाँ लगभग 1 एकड़ (67 हजार वर्गफीट) से अधिक के रकबे में आश्रम का विस्तार हो चुका है। दस्तावेजों के अनुसार, यह भूमि 21 अगस्त 2025 को संत शांतिनाथ द्वारा 'मां नर्मदा श्री उत्तम शांतिनाथ' के नाम हस्तांतरित की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले एक साल में यहाँ तेजी से नया निर्माण किया गया है। पुराने छोटे भवन की जगह अब एक भव्य परिसर ने ले ली है, जिसके लिए न तो ग्राम पंचायत से अनुमति ली गई और ना ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से कोई नक्शा पास कराया गया।
दो शिष्यों के बीच बंटी जमीन, कथा के पंडाल तक फैला विवाद
जांच में यह भी सामने आया है कि इस विशाल भूखंड का मालिकाना हक दो स्वामियों के बीच बंटा हुआ है। एक हिस्सा उत्तम स्वामी के नाम है, तो उससे सटा हुआ दूसरा हिस्सा मंगलनाथ स्वामी के नाम दर्ज है। ये दोनों ही संत शांतिनाथ के शिष्य बताए जाते हैं। हाल ही में 19 से 15 फरवरी के बीच जिस भव्य भागवत कथा का आयोजन किया गया था, उसका विशाल पंडाल मंगलनाथ के हिस्से वाली भूमि पर लगाया गया था। चूंकि पूरी जमीन का मद कृषि है, इसलिए व्यावसायिक या सार्वजनिक आयोजनों के लिए भी अनुमति की प्रक्रिया संदिग्ध मानी जा रही है। प्रशासन अब इन दोनों हिस्सों के दस्तावेजों की बारीक जांच कर रहा है।
रसूख के आगे बौना साबित हुआ प्रशासन, अब बुलडोजर की आहट
उत्तम स्वामी के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इतने वर्षों तक स्थानीय पटवारी, आरआई और तहसील कार्यालय के किसी भी अधिकारी ने निर्माण की वैधता पूछने की हिम्मत नहीं दिखाई। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। दुष्कर्म के संगीन आरोपों के बाद प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट है कि यदि जांच में निर्माण अवैध पाया जाता है—जिसकी पुष्टि शुरुआती खसरा रिपोर्ट पहले ही कर चुकी है—तो आश्रम के अवैध हिस्से पर प्रशासन का बुलडोजर चल सकता है। नियमानुसार, अवैध निर्माण को ध्वस्त करना या भारी जुर्माना लगाकर उसे कुर्क करने का प्रावधान है।
गड़बड़ी मिली तो सख्त एक्शन होगा
राजस्व नियमों के तहत यदि भूमि का मद कृषि है, तो उस पर किसी भी प्रकार का पक्का निर्माण करने से पहले उसका डायवर्शन कराना और संबंधित निकाय से भवन निर्माण की मंजूरी लेना अनिवार्य है। हीरापुर बंधा स्थित आश्रम की भूमि के रिकॉर्ड मंगाए गए हैं। हम इसकी गहनता से जांच करा रहे हैं कि क्या निर्माण से पूर्व भूमि के मद में परिवर्तन कराया गया था या नहीं। यदि उल्लंघन पाया गया, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मदन सिंह रघुवंशी, एसडीएम, शहपुरा (जबलपुर)
