रादुविवि कुलगुरु की नियुक्ति विवाद: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया जवाब पेश करने का अंतिम मौका


जबलपुर
। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु की नियुक्ति को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब और गहरा गया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर सख्त रुख अपनाते हुए जवाब पेश करने के लिए अंतिम अवसर दिया है। एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष सचिन रजक द्वारा दायर याचिका में कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा की नियुक्ति को सीधे तौर पर चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रो. वर्मा की नियुक्ति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग  के अनिवार्य नियमों की अनदेखी की गई है। दलील दी गई है कि कुलगुरु जैसे गरिमामय पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक अनुभव और मापदंडों को ताक पर रखकर यह प्रक्रिया पूरी की गई है, जिससे पूरी नियुक्ति ही अवैध श्रेणी में आती है।

​अनुभव और योग्यता के मापदंडों का उल्लंघन

​याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि नियमानुसार कुलगुरु पद के लिए पीएचडी के बाद कम से कम 10 वर्ष का शैक्षणिक अनुभव होना अनिवार्य है। आरोप है कि प्रो. वर्मा की पूर्व में प्राध्यापक पद पर हुई नियुक्ति ही प्रक्रियात्मक विसंगतियों से भरी थी। यदि आधार (प्राध्यापक पद) ही नियमों के विरुद्ध है, तो उस आधार पर दी गई कुलगुरु की जिम्मेदारी भी कानूनन गलत है।

​हाईकोर्ट की सख्ती और सरकार को अंतिम मोहलत

​जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार द्वारा जवाब देने में की जा रही देरी पर नाराजगी जताई। रिकॉर्ड के अनुसार, प्रतिवादियों को अप्रैल 2025 में ही नोटिस तामील कर दिया गया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने अब राज्य सरकार को 4 सप्ताह की अंतिम मोहलत देते हुए साफ कर दिया है कि इसके बाद और समय नहीं दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई अब 23 मार्च को होगी।

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