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रेलवे गेटमैन की टावर बैगन की चपेट में आने से दर्दनाक मौत, ट्रेक पर पहुंचे बेटे को बचाते समय हादसा

कोटा। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा रेल मंडल के कोटा-चित्तौडग़ढ़ रेल खंड पर बेहद दर्दनाक घटना घटी, जिसने रेल कर्मचारियों को दुखी कर दिया है. बरूंदनी और सिंगोली स्टेशन के बीच स्थित रेलवे फाटक संख्या 96 पर तैनात गेटमैन हरिओम अहिरवार (30) ने अपने ढाई साल के मासूम बच्चे की जान बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। रेल कर्मचारी का आज गुरूवार 19 फरवरी को पीएम करा कर शव परिवारजनों को सौंपा गया है.

यह दर्दनाक घटना बुधवार देर की है। हरिओम अहिरवार गेट के पास ही बने रेलवे क्वार्टर में अपने परिवार के साथ रहते थे। ड्यूटी के दौरान उनका छोटा बच्चा खेलते-खेलते अचानक रेल पटरी पर पहुँच गया। उसी समय बिजली लाइनों (ओएचई) के रखरखाव में इस्तेमाल होने वाली टावर वैगन कोटा की ओर लौट रही थी और उसके आने के सिग्नल हो चुके थे।

बेटे को दिया जीवनदान, खुद की जान नहीं बचा सके

पटरी पर मौत की तरह बढ़ती टावर वैगन को देख हरिओम ने आव देखा न ताव और बच्चे की ओर दौड़ लगा दी। उन्होंने फुर्ती से बच्चे को पटरी से दूर धकेल दिया, जिससे मासूम की जान तो बच गई, लेकिन अफसोस कि हरिओम खुद को नहीं बचा सके। टावर वैगन की चपेट में आने से उनके सिर और गर्दन पर गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई।

टावर वैगन की रफ्तार पर सवालिया निशान

सूचना मिलते ही कोटा से रेलवे अधिकारी और भीलवाड़ा की बीगोद थाना पुलिस मौके पर पहुँची। प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारी, टीआरडी कर्मचारियों और वैगन चालक से पूछताछ कर रहे हैं कि क्या वैगन की रफ्तार अधिक थी? क्या दूर से पटरी पर मौजूद व्यक्ति नजर नहीं आया? और समय रहते इमरजेंसी ब्रेक क्यों नहीं लग सके? हरिओम मांडलगढ़ रेल पथ सुपरवाइजर के अधीन कार्यरत थे। इस हादसे के बाद उनकी पत्नी और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। साथी कर्मचारियों ने बताया कि हरिओम एक बेहद मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी थे। 

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