जबलपुर। जिले में नर्मदा के घाटों और ग्रामीण क्षेत्रों में जारी रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के स्पष्ट निर्देशों के बाद माइनिंग, राजस्व और पुलिस विभाग की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया है। इसी कड़ी में गुरुवार को टीम ने सिहोरा, मझौली और चरगवां जैसे संवेदनशील इलाकों में आकस्मिक दबिश दी। चरगवां में कार्रवाई के दौरान किनारे जमा की गई अवैध रेत को टीम ने वापस नदी में बहा दिया, ताकि उसका दुरुपयोग न हो सके।
पीछा करने पर भी नहीं आए हाथ
गुरुवार सुबह जब माइनिंग टीम चरगवां पहुँची, तो वहां रेत से लदे ट्रैक्टरों ने टीम को देखते ही रफ्तार बढ़ा दी और भागने में सफल रहे। इसके बाद टीम मझौली के देवरी और खिन्नी घाट पहुँची, जहाँ नावों और मशीनों के जरिए रेत निकालने की सूचना मिली थी। हालांकि, सरकारी अमले के पहुँचने से पहले ही माफिया अपनी मशीनें और किश्तियां लेकर रफूचक्कर हो गए। टीम ने कुछ दूरी तक उनका पीछा भी किया, लेकिन वे पकड़ में नहीं आए। माइनिंग अधिकारी ए.के. राय ने पुष्टि की है कि छापेमारी के दौरान माफिया मौके से फरार होने में कामयाब रहे।
सड़कों पर तैनात कर रखे हैं 'मुखबिर'
सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में हुई लगातार कार्रवाई के बाद रेत और गिट्टी माफिया बेहद सतर्क हो गए हैं। स्थिति यह है कि इनका सूचना तंत्र सरकारी नेटवर्क से भी अधिक सक्रिय नजर आ रहा है। माफियाओं ने घाटों की ओर जाने वाले रास्तों पर 1-2 किलोमीटर पहले ही अपने गुर्गे (मुखबिर) तैनात कर दिए हैं। जैसे ही प्रशासन या पुलिस की गाड़ी इलाके में प्रवेश करती है, ये गुर्गे तुरंत घाट पर सूचना भेज देते हैं। यही कारण है कि टीम के मौके पर पहुँचने से पहले ही उत्खनन स्थल खाली हो जाते हैं और परिवहन करने वाले वाहन अपना रास्ता बदल लेते हैं।
