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हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: ईर्ष्या से उपजी 'मानसिक विकृति' है शिखा हत्याकांड


सगी बहन की हत्या मामले में खुशबू और उसके प्रेमी की सजा जारी,90 दिन में नीति लाएगी सरकार

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नरसिंहपुर के चर्चित 'शिखा हत्याकांड' में अपना फैसला सुनाते हुए दोषियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। आरोपी बड़ी बहन खुशबू और उसके प्रेमी राहुल की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए कोर्ट ने इस घटना को समाज और रिश्तों के लिए एक गंभीर चेतावनी माना है।

ईर्ष्या और मानसिक विकृति का परिणाम

​जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यह महज एक अपराध नहीं है, बल्कि सगी बहनों के बीच ईर्ष्या से उपजी एक 'मानसिक विकृति' है। कोर्ट के अनुसार, जब निजी स्वार्थ और प्रेम संबंधों के लिए सगे रिश्तों का खून बहाया जाए, तो यह समाज के गिरते मानसिक स्वास्थ्य का संकेत है।

लव मैरिज की राह में बाधा बनी थी बहन

​यह पूरा मामला मार्च 2023 का है, जब खुशबू अपनी छोटी बहन शिखा की हत्या की साजिश रची। खुशबू उत्तर प्रदेश के राहुल के साथ प्रेम विवाह करना चाहती थी, जिसका शिखा विरोध कर रही थी। साजिश के तहत खुशबू ने पहले अपनी माँ को नींद की गोलियां देकर बेहोश किया और फिर प्रेमी के साथ मिलकर अपनी ही छोटी बहन को मौत के घाट उतार दिया।

सरकार को निर्देश: 90 दिन में लाएं मानसिक स्वास्थ्य नीति

​हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार को बड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि प्रदेश के युवाओं के लिए एक ठोस मानसिक स्वास्थ्य नीति बनाई जाए। इसके लिए सरकार को 90 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने का समय दिया गया है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए हाईकोर्ट ने सुझाव दिया है कि केवल सजा पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि ​सभी स्कूलों और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नियुक्ति अनिवार्य की जाए।​प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में विशेष मानसिक स्वास्थ्य क्लीनिक शुरू किए जाएं, ताकि युवाओं को सही परामर्श मिल सके।


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