जबलपुर। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने प्रदेश की बिजली आपूर्ति को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। कंपनी ने मंदसौर स्थित 400 केवी सबस्टेशन में 500 एमवीए क्षमता का एक अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर सफलतापूर्वक स्थापित कर ऊर्जीकृत कर दिया है। इस परियोजना के पूरा होने से न केवल सेंट्रल ग्रिड से मध्य प्रदेश के हिस्से की बिजली मिलना आसान होगा, बल्कि क्षेत्र में सौर ऊर्जा की निकासी भी सुलभ हो जाएगी।ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रोजेक्ट एमपी ट्रांसको की कार्यकुशलता और उपभोक्ताओं के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे आने वाले वर्षों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी।
सौर ऊर्जा निकासी और चंबल पंपिंग परियोजनाओं को मिलेगा बल
एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता श्री राजीव अग्रवाल ने बताया कि इस उच्च क्षमता वाले ट्रांसफार्मर से सोलर पावर की बड़े पैमाने पर निकासी सुगम होगी। इसके साथ ही, यह चंबल पंपिंग परियोजनाओं और सिंचाई परियोजनाओं के पंपिंग सबस्टेशनों की बिजली संबंधी जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। पावरग्रिड के नीमच सबस्टेशन से अब मध्य प्रदेश को अपने हिस्से की पूरी बिजली नियमित रूप से मिल सकेगी, जिससे क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी।
84,000 एमवीए के पार पहुँची ट्रांसमिशन क्षमता
इस नए ट्रांसफार्मर के सक्रिय होने के साथ ही मध्य प्रदेश राज्य की कुल पारेषण क्षमता (ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी) बढ़कर 88,736 एमवीए हो गई है। इसमें अकेले एमपी ट्रांसको का हिस्सा 84,023 एमवीए तक पहुँच गया है। वर्तमान में प्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क में कुल 1,091 पावर ट्रांसफार्मर क्रियाशील हैं, जिनमें से 1,043 ट्रांसफार्मर एमपी ट्रांसको के हैं। प्रदेश में वर्तमान में 439 एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण किया जा रहा है, जिनमें एमपी ट्रांसको के 417 सबस्टेशन शामिल हैं। मंदसौर में स्थापित यह नया सिस्टम भविष्य में पावर ग्रिड द्वारा निर्माणाधीन 765 केवी सबस्टेशन से भी तालमेल बिठाकर प्रदेश को बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगा।
