नई दिल्ली। ट्रैक पर दौड़ती ट्रेन अगर दो हिस्सों में बंट जाए और गेटमैन लाल झंडी की जगह हरी झंडी दिखा रहा हो तो चौंकिएगा नहीं। भारतीय रेलवे ने रेल यात्रा को सुरक्षित बनाने और हादसों को रोकने के लिए ट्रेन पार्टिंग (चलती ट्रेन का दो हिस्सों में बंट जाना) की स्थिति में संकेतों के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ऐसी आपात स्थिति में गेटमैन या आन-ड्यूटी स्टाफ लाल झंडी दिखाकर ट्रेन को रोकने का प्रयास नहीं करेंगे। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में सभी के जोन को जारी करते हुए नई व्यवस्था पर अमल करने का निर्देश दिया है.
उल्लेखनीय है कि अक्सर ट्रेन के अलग होने पर गेटमैन घबराहट में लाल झंडी दिखा देते थे, जिसे देख लोको पायलट इमरजेंसी ब्रेक लगा देता था। इससे पीछे से आ रहे कटे हुए हिस्से के अगले हिस्से से टकराने का गंभीर खतरा रहता था। इसी जोखिम को टालने के लिए अब स्टाप सिग्नल को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
सीटी बजाकर ध्यान आकर्षित करेंगे
नए नियमों के तहत अब दिन के समय गेटमैन हरी झंडी या अपने हाथ को ऊपर से नीचे की ओर लंबवत लहराकर विशेष संकेत देंगे। वहीं रात के समय सफेद रोशनी को जितना संभव हो सके ऊपर और नीचे लहराकर ड्राइवर और गार्ड को सूचित किया जाएगा। इसके साथ ही गेटमैन लगातार सीटी बजाकर या चिल्लाकर चालक दल का ध्यान आकर्षित करेंगे ताकि वे समझ सकें कि ट्रेन दो हिस्सों में बंट चुकी है।
संकेतों में स्पष्टता हो
रेलवे बोर्ड की उप निदेशक यातायात श्वेता शर्मा ने पश्चिम मध्य रेलवे सहित सभी जोन के प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधक (पीसीओएम) को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। बोर्ड का मानना है कि संकेतों में स्पष्टता आने से देशभर में एक समान सुरक्षा प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी।
