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जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : रिटायर प्राध्यापक को मिलेगी पूरी ग्रेच्युटी और 7वें वेतनमान के अनुसार पेंशन

जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर के माननीय न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने डॉ. एम.एल.वी. राव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम निर्णय प्रदान किया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय शंकर रायजादा एवं अमित रायजादा ने बताया कि याचिककर्ता के राज्य शासन के परिपत्रों के अनुसार अधिकतम 20 लाख रुपये की डीसीआरजी (ग्रेच्युटी) राशि का लाभ तथा सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार पेंशन मुगतान किया जाना था जबकि उन्हें केवल ग्रेच्युटी के रूप में 10 लाख रुपये एवं छटवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार पेंशन दी जा रही है । उन्होंने यह भी बताया गया कि राज्य शासन द्वारा जारी परिपत्रों के अनुसार 7वें वेतन आयोग की संस्तुतियां विश्वविद्यालयों पर  लागू की जा चुकी हैं और इसके अंतर्गत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बढ़ी हुई ग्रेच्युटी एवं संशोधित पेंशन का लाभ दिया जाना अनिवार्य है।

विश्वविद्यालय की ओर से यह तर्क दिया गया कि संबंधित परिपत्रों को विश्वविद्यालय द्वारा औपचारिक रूप से अंगीकृत नहीं किया गया है तथा वित्तीय स्थिति कमजोर होने के कारण भुगतान संभव नहीं है। माननीय न्यायालय ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट कहा कि किसी संस्था की आर्थिक स्थिति सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वैधानिक एवं अर्जित पेंशनरी लाभों के भुगतान से बचने का आधार नहीं हो सकती।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य शासन के परिपत्र के अनुसार 26 अक्टूबर 2017 का परिपत्र विश्वविद्यालयों पर लागू है और विश्वविद्यालय को इसके लिए अलग से राज्य शासन से स्वीकृति लेने की आवश्यकता नहीं है। माननीय  न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित विश्वविद्यालय को निर्देश दिए कि वह याचिकाकर्ता को शेष 10 लाख रुपये की डीसीआरजी राशि का भुगतान करे तथा 7वें वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुसार उनकी पेंशन पुन: निर्धारित कर भुगतान सुनिश्चित करे।

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