गाली के लिए 'सार्वजनिक स्थान' जरूरी: जबलपुर हाई कोर्ट ने छतरपुर के 13 साल पुराने मामले में दी राहत


जबलपुर।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि फोन कॉल के दौरान दी गई कथित गाली को भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। न्यायालय के अनुसार, इस धारा के तहत अपराध तब माना जाता है जब वह सार्वजनिक स्थान पर किया गया हो। जस्टिस बीपी शर्मा की सिंगल बेंच ने इस टिप्पणी के साथ छतरपुर जिले में दर्ज एक पुरानी एफआईआर को रद्द करते हुए आरोपियों को बरी कर दिया है।

क्या था मामला और कोर्ट ने क्या कहा

​यह मामला 18 जुलाई 2011 का है, जब छतरपुर जिले के कोतवाली थाने में दीपक भटनागर व अन्य के खिलाफ धारा 294 और 506बी के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। उन पर फोन करके अपने ससुर को गाली देने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप था। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता पुनीत श्रोती ने पक्ष रखा, जिसे स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने माना कि फोन पर कही गई अश्लील भाषा सार्वजनिक कृत्य नहीं है। अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा और केरल हाई कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं के खिलाफ चल रहे मुकदमे को पूरी तरह खारिज कर दिया।

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