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IAS संतोष वर्मा मामला: अजाक्स ने 'मीडिया ट्रायल' पर जताई कड़ी आपत्ति, सरकार के 'कारण बताओ नोटिस' को बताया असंवैधानिक,देखें वीडियो


जबलपुर।
मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) ने प्रदेश के नवनियुक्त प्रांताध्यक्ष संतोष वर्मा (IAS) के विरुद्ध की गई प्रशासनिक कार्रवाई और मीडिया द्वारा चलाए जा रहे 'मीडिया ट्रायल' के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। संघ की जबलपुर इकाई द्वारा मुख्यमंत्री, राज्यपाल और मुख्य सचिव के नाम एक ज्ञापन सौंपकर इस मामले में हस्तक्षेप करने और न्याय की अपील की गई है।ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि 23 नवंबर 2025 को आयोजित प्रांतीय अधिवेशन में संतोष वर्मा ने सामाजिक एकता, सद्भाव और जातिवाद उन्मूलन पर संवैधानिक विचार साझा किए थे। संघ का आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों और स्वार्थी संगठनों ने उनके भाषण को तोड़-मरोड़कर पेश किया है, जिससे सामाजिक वैमनस्य फैलाने की कोशिश की जा रही है। 

सरकार की कार्यप्रणाली और मीडिया की भूमिका पर उठाए सवाल


अजाक्स संघ ने राज्य सरकार द्वारा श्री वर्मा को बिना किसी निष्पक्ष जांच या तथ्यों के विश्लेषण के 'कारण बताओ नोटिस' जारी करने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संघ का कहना है कि सरकार की यह त्वरित कार्रवाई संवैधानिक मूल्यों और विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 14, 15(4) और 16(4) की भावना के विपरीत है। यह कदम आदिवासी और वंचित वर्गों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।इसके साथ ही, ज्ञापन में मीडिया संस्थानों की भूमिका की कड़ी निंदा की गई है। संघ ने आरोप लगाया कि मीडिया द्वारा एकपक्षीय और भ्रामक खबरें चलाकर 'मीडिया ट्रायल' किया जा रहा है, जिससे एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की गरिमा को ठेस पहुँच रही है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मीडिया और प्रशासन का यह नकारात्मक रवैया नहीं बदला, तो प्रदेश का 36 प्रतिशत SC/ST समाज लोकतांत्रिक तरीके से विरोध और बहिष्कार करने को मजबूर होगा।

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