दो दशकों से लंबित कैडर रिव्यू पर ट्रिब्यूनल की कड़ी टिप्पणी, 120 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूर्ण करने का आदेश
जबलपुर। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), जबलपुर पीठ ने मध्य प्रदेश के पुलिस अधिकारियों के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए केंद्र और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी व्यक्त की है। ट्रिब्यूनल ने मध्यप्रदेश पुलिस एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका (OA no 72/24) को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के कैडर रिव्यू में देरी करना न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि यह अधिकारियों के मौलिक अधिकारों का हनन भी है।
अनिवार्य वैधानिक दायित्व की अनदेखी पर सरकारों को फटकार
माननीय ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि भारतीय पुलिस सेवा (कैडर) नियम, 1954 के तहत प्रत्येक पाँच वर्ष में कैडर रिव्यू किया जाना एक अनिवार्य वैधानिक कर्तव्य है। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पिछले लगभग 20 वर्षों से इस प्रक्रिया को लगातार टाला जा रहा था। ट्रिब्यूनल ने कहा कि कैडर रिव्यू कोई विवेकाधीन कार्य नहीं है जिसे सरकारों की इच्छा पर छोड़ दिया जाए। इस देरी के कारण राज्य पुलिस सेवा (DSP/ASP) के कई पात्र अधिकारी अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित हो रहे हैं और IPS में पदोन्नति का अवसर खो रहे हैं।
120 दिनों में प्रक्रिया पूरी करने का समयबद्ध आदेश
आवेदक पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पंकज दुबे और अक्षय खंडेलवाल ने दलील दी कि पदोन्नति पर विचार किया जाना अनुच्छेद 14 और 16 के तहत एक मौलिक अधिकार है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के 'हेमराज सिंह चौहान' मामले का हवाला देते हुए बताया कि मध्य प्रदेश के अधिकारी अन्य राज्यों की तुलना में काफी पिछड़ गए हैं। कई अधिकारी 56 वर्ष की आयु सीमा के करीब हैं, जिससे उनके इंडक्शन की संभावना हमेशा के लिए समाप्त हो सकती है। ट्रिब्यूनल ने इन चिंताओं को वाजिब मानते हुए केंद्र और राज्य सरकार को आदेशित किया है कि वे अतिरिक्त कैडर रिव्यू की प्रक्रिया को 120 दिनों के भीतर पूर्ण करें। इस निर्णय से राज्य पुलिस सेवा के सैकड़ों अधिकारियों में खुशी की लहर है, क्योंकि यह आदेश भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर बनेगा और समयबद्ध पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त करेगा।
