जबलपुर। उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें चलती ट्रेन में महिला यात्री के सामने अश्लील आचरण करने वाले बर्खास्त सिविल जज नवनीत सिंह यादव को वापस सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने इस मामले को न्यायपालिका की शुचिता और छवि से जुड़ा बताते हुए बेहद सख्त रुख अपनाया है।
क्या है पूरा मामला
यह घटना 17 जून 2018 की है। डिंडोरी के शाहपुरा में पदस्थ सिविल जज (क्लास-II) नवनीत सिंह यादव ओवरनाइट एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे थे। उन पर आरोप लगा कि नशे की हालत में उन्होंने ट्रेन के टॉयलेट के पास एक महिला यात्री के सामने पेशाब किया और अशोभनीय व्यवहार किया। हालांकि, 2019 में साक्ष्यों के अभाव में रेलवे कोर्ट ने उन्हें आपराधिक मामले से बरी कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट द्वारा की गई विभागीय जांच में उन पर लगे आरोप सही पाए गए थे। इसी आधार पर सितंबर 2019 में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख,रियायत मुम्किन नहीं
मई 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने बर्खास्तगी को रद्द कर बहाली का आदेश दिया था, जिसे हाईकोर्ट प्रशासन ने ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि ऐसे कृत्यों के लिए 'बहाली नहीं, बल्कि बर्खास्तगी' ही एकमात्र विकल्प होनी चाहिए। जस्टिस विक्रम नाथ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एक महिला की उपस्थिति में इस तरह का आचरण न्यायिक सेवा की गरिमा के बिल्कुल विपरीत है और इसमें किसी भी तरह की नरमी समाज में गलत संदेश देती है। शीर्ष अदालत ने फिलहाल बहाली पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारी और राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
