तथ्य छिपाने और अनुशासनहीनता के आरोप: सीनियर एडवोकेट का डेजिग्नेशन छीनने के लिए लामबंद हुए वकील


तीन बार एसोसिएशनों ने मुख्य न्यायाधिपति को सौंपा प्रतिवेदन

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के सीनियर एडवोकेट रामेश्वर प्रसाद सिंह ठाकुर की वरिष्ठ अधिवक्ता की पदवी (डेजिग्नेशन) वापस लेने के लिए जबलपुर की तीन प्रमुख बार एसोसिएशनों ने संयुक्त मोर्चा खोल दिया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन, जिला अधिवक्ता संघ और हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन ने 21 जनवरी को मुख्य न्यायाधिपति को एक औपचारिक प्रतिवेदन सौंपकर इस दिशा में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

 आपराधिक व दीवानी मामलों की जानकारी छिपाने का आरोप

​प्रतिवेदन में श्री ठाकुर पर सबसे गंभीर आरोप 'तथ्यों के दमन' और 'मिथ्या घोषणा' का लगाया गया है। एसोसिएशनों का कहना है कि 5 अक्टूबर 2024 को सीनियर एडवोकेट की पदवी के लिए आवेदन करते समय श्री ठाकुर ने हलफनामा दिया था कि उनके विरुद्ध कोई भी आपराधिक या दीवानी प्रकरण लंबित नहीं है।दावा किया गया है कि वास्तविकता इसके विपरीत है। प्रतिवेदन के अनुसार, जबलपुर के सिविल लाइन थाने में उनके विरुद्ध अपराध क्रमांक 195/2022 (RCT No. 31293/2022) लंबित है, जिसमें वे एकमात्र नामजद आरोपी हैं। इसके अलावा, उनके द्वारा स्वयं दायर एक दीवानी वाद (RCSA No. 7394/2019) भी विचाराधीन है। इन तथ्यों को छिपाना नियमों का उल्लंघन माना गया है।

जातिगत तनाव और अनुशासनहीनता फैलाने के गंभीर आरोप

​बार एसोसिएशनों ने श्री ठाकुर पर उच्च न्यायालय परिसर की गरिमा के प्रतिकूल आचरण करने का भी आरोप लगाया है। प्रतिवेदन में 13 जनवरी 2026 की एक घटना का उल्लेख है, जिसके बाद उन पर अधिवक्ताओं के बीच जातिगत आधार पर तनाव और कलह पैदा करने का आरोप लगा। बार का दावा है कि श्री ठाकुर ने यह भ्रामक सूचना फैलाई कि ग्वालियर के अधिवक्ता अनिल मिश्रा को बार एसोसिएशनों द्वारा सम्मानित करने के लिए बुलाया गया था, जबकि आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई निमंत्रण नहीं दिया गया था। इस आचरण को गंभीरता से लेते हुए एसोसिएशनों ने उन्हें सदस्यता समाप्ति का 'कारण बताओ नोटिस' भी जारी कर दिया है।

'फुल कोर्ट' के समक्ष प्रकरण पेश करने का आग्रह

​16 जनवरी 2026 को हुई संयुक्त बैठक में पारित प्रस्ताव के आधार पर, मुख्य न्यायाधिपति से प्रार्थना की गई है कि इस पूरे मामले को 'फुल कोर्ट' के समक्ष रखा जाए। बार एसोसिएशनों ने मांग की है कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय नियम 2025 के नियम 15 (पेशेवर कदाचार और अमर्यादित आचरण) के तहत कार्रवाई करते हुए उनकी सीनियर पदवी तत्काल रद्द की जाए।इस प्रतिवेदन को सौंपने वालों में अधिवक्ता संगठनों की ओर से धन्य कुमार जैन, संजय अग्रवाल, मनीष मिश्रा, परितोष त्रिवेदी, अमित जैन और बार की कार्यकारिणी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं।

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