दिव्यांग बच्चों की 'खामोशी' का फायदा उठाकर किया करोड़ों का घोटाला, दोषी प्रबंधक बर्खास्त


ऑडिट में खुला राज: जबलपुर में बाल श्रवण योजना की राशि में हुई अनियमितता,मिशन डायरेक्टर ने जारी किया आदेश

जबलपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन डायरेक्टर ने एक कड़ा कदम उठाते हुए जबलपुर के जिला प्रबंधक सुभाष शुक्ला को संविदा सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना के अंतर्गत दिव्यांग बच्चों के उपचार की राशि में करोड़ों रुपये के गबन और अनियमितता की पुष्टि होने के बाद की गई है। महालेखाकार  ऑडिट में 2.27 करोड़ रुपये का अनुपयोगी व्यय और लगभग 9 लाख रुपये का सीधा भ्रष्टाचार उजागर हुआ था।

-​फर्जी हस्ताक्षर से करोड़ों का गबन

​महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि जिला प्रबंधक सुभाष शुक्ला द्वारा जन्मजात गूंगे-बहरे बच्चों का बिना उपचार कराए ही भुगतान की फाइलें (नोटशीट) तैयार कर राशि निकाल ली गई। योजना के नियमनुसार, एक बच्चे की स्पीच थेरेपी के लिए शासन द्वारा 1.30 लाख रुपये जारी किए जाते हैं। ऑडिट में पाया गया कि 2.27 करोड़ रुपये का व्यय पूरी तरह अनुपयोगी रहा क्योंकि बच्चों का आवश्यक फॉलो-अप और इलाज संबंधित संस्थाओं में हुआ ही नहीं। जांच में सामने आया कि बच्चों के परिजनों के फर्जी हस्ताक्षर कर राशि का आहरण कर लिया गया था।

-​शिवसेना की शिकायत पर हुई जांच

​भ्रष्टाचार का यह मामला तब सामने आया जब शिवसेना के शैलेंद्र बारी ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से लिखित शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले संभाग स्तर पर और फिर राज्य स्तरीय दल द्वारा उच्च स्तरीय जांच कराई गई। जांच अधिकारियों ने जब दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बच्चों को कोई स्पीच थेरेपी नहीं मिली। माता-पिता ने अपने बयानों में पुष्टि की कि उनके हस्ताक्षरों का दुरुपयोग कर शासन की राशि हड़प ली गई।

​मिशन डायरेक्टर ने जारी किए बर्खास्तगी के आदेश

​जांच में सभी आरोप सही पाए जाने के बाद, 20 जनवरी 2026 को मिशन डायरेक्टर ने आदेश जारी कर सुभाष शुक्ला को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निकाल दिया। आदेश में उल्लेख किया गया है कि जन्मजात दिव्यांग बच्चों के हक की राशि का गबन और फर्जीवाड़ा करना एक गंभीर कदाचरण है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

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